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हिंदी सप्ताह 2015 के पुरस्‍कार वितरण एवं समापन समारोह का आयोजन

सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान(आई.आई.टी.आर.)लखनऊ में दिनांक 21.09.2015 को अपराह्न 3:00 बजे हिंदी सप्ताह 2015 के पुरस्कार वितरण एवं समापन समारोह का आयोजन किया गया। श्री चन्द्र मोहन तिवारी, हिंदी अधिकारी ने सभी का स्वागत किया।  इस अवसर पर मुख् अतिथि डॉ. .के. सिन्हा, निदेशक, भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ थे। मुख् अतिथि ने कहा कि हिंदी को सशक् भाषा की तरह स्थापित करना होगा।यह संपर्क की भाषा है। वे संस्थान में हिंदी की प्रगति से काफी प्रभावित हुए।  कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक, प्रोफेसर आलोक धावन ने की।  उन्होंने कहा कि हमारे संस्थान के वैज्ञानिक, तकनीकी एवं प्रशसनिक कर्मी और शोध छात्र हिंदी का भरपूर प्रयोग करते हैं। हिंदी को कठिन बनाकर सरल भाषा में प्रयोग किया जाए, ताकि सभी लोग समझ सकें। समय-समय पर हमारे वैज्ञानिक डी0डी0 किसान चैनल पर शोध से संबंधित सूचना देते हैं। उन्होंने कहा कि संस्थान में हिंदी के प्रयोग के लिए डिजिटल टूल् का भरपूर प्रयोग किया जा रहा है।  संस्थान की वेबसाइट पूर्णतया हिंदी में है और -मेल भी हिंदी में भेजा जाता है।  इस अवसर पर हिंदी सप्ताह के दौरान आयोजित वाद-विवाद, आशुभाषण, लेख, टिप्पण मसौदा लेखन, हिंदीतर भाषी का हिंदी ज्ञान, हिंदी टंकण, अनुवाद एवं क्विज प्रतियोगिताओं में विजयी प्रतिभागियों को प्रथम, द्वितीय तृतीय पुरस्कार एवं प्रमाणपत्र प्रदान किये गए। इसके अलावा वर्ष में हिंदी में कार्य करने की प्रोत्साहन योजना के अन्तर्गत विजयी प्रतियोगियों को दो प्रथम, तीन द्वितीय और पॉंच तृतीय तथा सबसे अधिक हिंदी में डिक्टेशन का एक पुरस्कार और प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया। श्री सी0पी0 अरुणन, प्रशासन नियंत्रक ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया।


सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्‍थान में हिंदी सप्‍ताह 2015 के उद्घाटन समारोह का आयोजन

सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान में दिनांक 14 सितंबर, 2015 को हिंदी सप्ताह 2015 के उद्घाटन समारोह का आयोजन किया गया।  इस अवसर पर श्री चन्द्र मोहन तिवारी, हिंदी अधिकारी ने सभी का स्वागत किया। कार्यक्रम के आरंभ में डॉ. आर.सी. मूर्ति, मुख् वैज्ञानिक ने राष्ट्र की सेवा में 50 वर्षों से समर्पित विषय पर अपना प्रस्तुतीकरण दिया। इस अवसर पर सीडीआरआई के वरिष्ठ हिंदी अधिकारी डॉ. वी.एन. तिवारी ने राजभाषा प्रबंधन पर अतिथि व्याख्यान दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्थान के निदेशक प्रोफेसर आलोक धावन ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी देश की उन्नति में भाषा का बहुत ही गहरा योगदान है।  भाषा की अभिव्यक्ति से इसका विकास होता है।  हिंदी एक समृद्ध भाषा है। संस्थान के नौ अनुभागों में  संपूर्ण कार्य हिंदी में होता है।  वैज्ञानिक संस्थान होने के बावजूद यहां हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग होता है इसीलिए संस्थान की राजभाषा पत्रिका कई बार पुरस्कृत हो चुकी है।  हमारे संस्थान के वैज्ञानिक, तकनीकी एवं प्रशासनिक कर्मियों और शोध छात्रों का राजभाषा कार्यान्वयन में काफी सहयोग रहा है।  संस्थान में हिंदी में शोध पत्र प्रकाशित हुए हैं।  संस्थान का प्रयास रहा है कि विज्ञान की उपलब्धि को ग्रामीण भारत तक पहुँचाएं।

 

श्री सी०पी०अरुणन, प्रशासन नियंत्रक ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया।


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