घटनाक्रम

सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थानन में "हिंदी सप्ताह 2019" के उद्घाटन समारोह का आयोजन

सी.एस.आई.आर.-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थानन (सीएसआईआर-आईआईटीआर), लखनऊ में मुख्य अतिथि डॉ दिनेश शर्मा, माननीय उप मुख्यमंत्री तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार, ने दिनांक 14 सितंबर, 2019 को हिंदी सप्ताह का उद्घाटन किया  एवं संस्थान की राजभाषा पत्रिका “विषविज्ञान संदेश” के अंक 31 का विमोचन भी किया। इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए माननीय उप मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हिंदी सप्ताह में संकल्प लेते हैं कि हम अपने कार्यों एवं विचार के आदान-प्रदान में हिंदी भाषा का प्रयोग करें। हिंदी बहुत समृद्ध और सरल भाषा है। इसके माध्यम से सभी प्रकार की उन्नति हो सकती  है।  यह अन्य भाषाओं के शब्दों को बड़ी सरलता से आत्मसात कर अपनी शैली में ढाल लेती है और बाद में वह शब्द हिंदी के ही लगने लगते हैं । जैसे गंगा अनेक नदियों को आत्मसात कर आगे बढ़ती जाती है। आईआईटीआर की राजभाषा पत्रिका–विषविज्ञान संदेश एवं अन्य हिंदी प्रकाशन प्रशंसनीय और आमजन हेतु लाभकारी हैं।  इनके माध्यम से संस्थान की वैज्ञानिक एवं तकनीकी कार्यों की जानकारी जनता तक पहुँच रही है। माननीय उप मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सरल एवं सुग्राह्य हिंदी का प्रयोग करें जिससे लोग आसानी से समझ सकें। आज जलवायु परिवर्तन हो रहा है, प्रदूषण बढ़ रहा है, जिससे अनेक समस्याएं उत्पन्न हो रहीं हैं। ऐसी जीवन शैली अपनाएं जिससे पर्यावरण संतुलन बना रहे। उत्तर प्रदेश सरकार ने पर्यावरण सुधार हेतु प्रदेश में करोड़ों वृक्ष लगाए हैं। 

समारोह के विशिष्ट अतिथि श्री टी. एन. खुन्टिया, पुलिस उप महानिरीक्षक, ग्रुप केंद्र, केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल, बिजनौर, लखनऊ ने अपने संबोधन में कहा कि  देश को एकता के सूत्र में बांधने में राजभाषा हिंदी का बहुत महत्व है। देश के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक भाषाएं प्रचलित हैं। टी. वी. एवं अन्य माध्यमों से बहुत परिवर्तन हुआ है। आज  सभी क्षेत्रों में हिंदी को लोग अच्छी तरह समझते और बोलते हैं।  

इस अवसर संस्थाहन के निदेशक, प्रोफेसर आलोक धावन ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि संस्थान 50 वर्ष से अधिक समय से पर्यावरण और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपनी सेवाएं निरंतर दे रहा है और हिंदी भाषा के माध्यम से आमजन तक वैज्ञानिक एवं तकनीकी जानकारी पहुँचा रहा है। संस्थान के 75 से 80% वैज्ञानिक कार्य हिंदी संचार माध्यमों में प्रकाशित हो रहे हैं। सीएसआईआर-आईआईटीआर, विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे और विषविज्ञान में मानव संसाधन के साथ 'स्वच्छ भारत अभियान', 'स्वस्थ भारत अभियान', 'मेक इन इंडिया', 'स्टार्टअप इंडिया‘, ‘डिजिटल इंडिया', 'स्मार्ट गांव', 'स्मार्ट शहर', 'नमामि गंगे', और' उन्नत भारत अभियान’ आदि, जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों में  समुचित वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग कर सतत विकास का लक्ष्य भी प्रदान करता है। हमारा संस्थान वैज्ञानिक और तकनीकी कार्यों में सहयोग कर उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने और राजभाषा के माध्यम से आमजन  तक जानकारी पहुंचाने के कार्य में निरंतर अग्रसर है।

इस अवसर पर सीएसआईआर-आईआईटीआर और सरदार पटेल पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल एंड मेडिकल साइंसेज, लखनऊ के बीच एक सहमति ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर भी हुए। सीएसआईआर-आईआईटीआर के निदेशक, प्रोफ़ेसर आलोक धावन एवं सरदार पटेल पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल एंड मेडिकल साइंसेज के प्रिंसिपल डॉ. परवीन मेहरोत्रा ने सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

डॉ. आलोक कुमार पाण्डेय, वैज्ञानिक, सीएसआईआर-आईआईटीआर ने अतिथिगण का स्वागत किया। श्री चन्द्र मोहन तिवारी, हिंदी अधिकारी ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। 

हिंदी सप्ताह 2019 के पुरस्कार वितरण एवं समापन समारोह का आयोजन

सीएसआईआर–भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान, लखनऊ में दिनांक 20.09.2019 को हिंदी सप्ताह–2019 के पुरस्कार वितरण एवं समापन समारोह का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री अजय मलिक, उप निदेशक, क्षेत्रीय कार्यान्वयन कार्यालय, (उत्तर) भारत सरकार, गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग थे। डॉ. देवेन्द्र परमार, मुख्य वैज्ञानिक ने सभी का स्वागत किया और संस्थान में राजभाषा कार्यान्वयन की प्रगति के बारे में बताया।  श्री चन्द्र् मोहन तिवारी, हिंदी अधिकारी एवं आयोजन के संचालक ने मुख्य अतिथि का औपचारिक परिचय दिया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने कहा कि अपनी भाषा का महत्व समझें, अपनी भाषा आत्मा से जुड़ी होती है। विशुद्ध वैज्ञानिक साहित्य की रचना हिंदी में करें यह आने वाली पीढ़ियों हेतु बहुत लाभकारी होगा। 

संस्थान के मुख्य वैज्ञानिक, डॉ. डी. कार चौधरी ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि राजभाषा के वार्षिक कार्यक्रम के अनुसार संस्थान में हिंदी कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है और इसके अतिरिक्त हिंदी में प्रकाशित विषविज्ञान संदेश, लघु पुस्तकें एवं विवरणिकाओं के द्वारा संस्थान की वैज्ञानिक उपलब्धियों की जानकारी आमजन तक पहुंचाई जा रही है। मुख्य अतिथि ने 09 प्रतियोगिताओं में 28 पुरस्कार एवं हिंदी में कार्य करने की प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 11 पुरस्कार प्रदान किए।

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वायु प्रदूषण एक वैश्विक आपातकाल की तरह हर किसी को प्रभावित कर रहा है। इस बढ़ती समस्या से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर समुदायों, व्यक्तियों, सरकारी एजेंसियों और समाज को एक साथ लाने की तत्काल आवश्यकता है। दुनिया भर के शहरों और क्षेत्रों में वायु की गुणवत्ता में सुधार हेतु अक्षय ऊर्जा और हरित प्रौद्योगिकियों के विभिन्न स्रोतों को टैप करने की आवश्यकता है। देश के प्रमुख विषविज्ञान संस्थान, सीएसआईआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च (सीएसआईआर-आईआईटीआर) लखनऊ में आज आयोजित विश्व पर्यावरण दिवस समारोह में इस विषय पर विचार किया गया।

सीएसआईआर-आईआईटीआर के मुख्य वैज्ञानिक डॉ डी कार चौधुरी ने सभा का स्वागत किया और संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 1974 में अपनी स्थापना के बाद से विश्व पर्यावरण दिवस समारोह के वार्षिक आयोजन के बारे में बताया। उन्होने कहा कि इस वर्ष के विश्व पर्यावरण दिवस समारोह का विषय "वायु प्रदूषण की रोकथाम" है। समारोह के एक भाग के रूप में विंग कमांडर परमवीर सिंह द्वारा 23वां डॉ सी आर कृष्णमूर्ति मेमोरियल व्याख्यान दिया गया। विंग कमांडर परमवीर सिंह भारतीय वायु सेना अधिकारी हैं, जो कि वर्तमान में स्वच्छ गंगा, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा कायाकल्प के लिए राष्ट्रीय मिशन में कार्यरत हैं। एडवेंचर स्पोर्ट्स एथलीट विंग कमांडर परमवीर सिंह  के नाम 13 विश्व, 3 एशियाई और 7 राष्ट्रीय रिकॉर्ड्स हैं, जो कि किसी भी भारतीय के पास नहीं हैं। खुले पानी के तैराक विंग कमांडर परमवीर सिंह ने गंगा नदी के पूरे विस्तार को पहली बार तैरकर ऐतिहासिक यात्रा पूरी की और यह कहा कि हर व्यक्ति अपने तरीके से इस स्वच्छ गंगा के लिए अपना योगदान दे सकता है। उन्होंने स्वच्छ भारत, नमामि गंगे और बेटी पढाओ-बेटी बचाओ अभियानों के लिए भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में सीएसआईआर-आईआईटीआर के निदेशक, प्रोफेसर आलोक धावन ने कहा कि विंग कमांडर परमवीर सिंह द्वारा दिया गया "गंगा आह्वान" विषयक व्याख्यान,  पर्यावरणीय विषविज्ञान और जैव अवक्रमण के क्षेत्रों में स्वयं अग्रणी रहे डॉ सी आर कृष्णमूर्ति को सच्ची श्र्द्धांजली है। प्रोफेसर धावन ने श्रोताओं की युवा पीढ़ी से आग्रह किया कि वे व्याख्यान से प्रेरणा लें और दुनिया को एक बेहतर स्थान बनाने की दिशा में अपना योगदान देने का प्रयास करें। इससे पहले सीएसआईआर-आईआईटीआर के मुख्य वैज्ञानिक डॉ एस सी बर्मन ने डॉ सी आर कृष्णमूर्ति मेमोरियल व्याख्यान के बारे में तथा संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ सी आर कृष्णमूर्ति की प्रतिभा तथा वैज्ञानिक योगदान का परिचय दिया। इस अवसर पर लखनऊ शहर की पर्यावरणीय अध्ययन रिपोर्ट का विमोचन किया गया और चित्रकला प्रतियोगिता एवं क्विज़ प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार दिये गए। 

सीएसआईआर-आईआईटीआर के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक ए एच खान ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया।

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सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान देश का प्रमुख विषविज्ञान संस्थान ने 14 नवंबर, 2019 को अपने महात्मा गांधी मार्ग, लखनऊ परिसर में 54 वां वार्षिक दिवस मनाया।

पद्म भूषण, प्रोफेसर पी. बलराम, पूर्व निदेशक, भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु और समारोह के मुख्य अतिथि ने वार्षिक दिवस संबोधन दिया। डॉ. राकेश के. मिश्रा, निदेशक, सीएसआईआर-कोशिकीय और आणविक जीवविज्ञान केंद्र, हैदराबाद इस कार्यक्रम के सम्माननीय अतिथि थे।

संस्थान के निदेशक प्रोफेसर आलोक धावन ने सभा का स्वागत किया और वर्ष 2018-2019 की संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने इस वर्ष के दौरान संस्थान की कई सफल कहानियों के बारे में सभा को अवगत कराया और कहा कि स्थापना दिवस अतीत की सफलताओं को संजोने और भविष्य के लिए लक्ष्य निर्धारित करने का एक उपयुक्त अवसर होता है। उन्होंने स्वच्छ भारत, स्वच्छ भारत, कौशल भारत, नमामि गंगे आदि जैसे राष्ट्रीय मिशन कार्यक्रमों के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराई और सभा को सूचित किया कि  डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के साथ, संस्थान डिजिटल प्रारूप में 2015 से अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी कर रहा है। 

इस अवसर पर, सीएसआईआर-आईआईटीआर वार्षिक रिपोर्ट, समाचार लेखों का संकलन और वर्ष 2020 के लिए संस्थान का कैलेंडर जारी किया गया। सीएसआईआर-आईआईटीआर के कई स्टाफ सदस्यों और सहयोगियों को संस्थान में उनकी विशिष्ट सेवा के लिए मान्यता दी गई और मुख्य अतिथि द्वारा सम्मानित किया गया।

प्रकाशनों का विमोचन करने के बाद, सीएसआईआर-आईआईटीआर के मुख्य वैज्ञानिक, डॉ. डी. कार चौधुरी ने अतिथियों का परिचय दिया।

प्रोफेसर बलराम, आणविक जैव भौतिकी के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक ने वार्षिक दिवस के संबोधन में कहा कि अंतःविषय दृष्टिकोण और ट्रांसलेशनल संबंधी अनुसंधान के लिए बुनियादी विज्ञान अनुसंधान ही नींव है जो किसी भी अनुवादकीय परिणामों की सफलता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। एक संस्थान के वार्षिक दिवस समारोह का समय इसके निर्माण के उद्देश्य को प्रतिबिंबित करने और क्या परिकल्पित किए गए परिणामों को प्राप्त किया गया है, इसका उल्लेख करने हेतु भी सही समय है। उन्होंने वैज्ञानिक चुनौतियों का सामना करने एवं उन्हें हल करने हेतु वैज्ञानिकों को उत्साह से कार्य करने और उत्साह को बनाए रखने हेतु प्रोत्साहित भी किया।

अपने संबोधन में डॉ. राकेश के. मिश्रा ने सीएसआईआर-आईआईटीआर परिवार को इस महत्वपूर्ण मील के पत्थर पर बधाई दी और वैज्ञानिकों से संस्थान के आदर्श वाक्य यानी पर्यावरण और स्वास्थ्य और सेवा से उद्योग तक के उद्देश्य को पूरा करने के लिए खुद को फिर से समर्पित करने का आग्रह किया।

डॉ. के. सी. खुल्बे, वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया। संस्थान के शोध छात्रों, कर्मचारियों और उनके परिवारों द्वारा अपनी वैज्ञानिक उपलब्धियों के अलावा अपनी रचनात्मक और अभिनव क्षमताओं के प्रदर्शन युक्त एक सांस्कृतिक उत्सव के साथ समारोह का समापन हुआ।

23वॉं प्रोफेसर सिब्ते हसन जैदी व्याख्यान का आयोजन देश के प्रमुख विषविज्ञान संस्थान, सीएसआईआर-सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान में किया गया। संस्थान के संस्थापक निदेशक प्रोफेसर सिब्ते हसन जैदी के सम्मान के लिए व्याख्यान का आयोजन हर वर्ष किया जाता है। इस वर्ष 54वें वार्षिक दिवस समारोह के एक भाग के रूप में, व्याख्यान डॉ. राकेश, के. मिश्रा, निदेशक, सीएसआईआर-सेलुलर और आणविक जीवविज्ञान केंद्र, हैदराबाद द्वारा दिया गया।

सीएसआईआर-आईआईटीआर के निदेशक, प्रोफेसर आलोक धावन ने सभा का स्वागत करते हुए कहा कि दूरदर्शी प्रोफेसर जैदी ने 50 साल से अधिक समय पहले इस संस्थान का निर्माण किया था ताकि पर्यावरण सुरक्षा और उद्योग के लिए सेवा सुनिश्चित हो सके, जो इस दिन के लिए प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि यह वास्तव में दर्शकों के बीच विषविज्ञान के क्षेत्र में कई दिग्गजों की उपस्थिति के साथ संस्थान और उसके कर्मचारियों के लिए एक विशेष अवसर था।

मुख्य वैज्ञानिक डॉ. देवेंद्र परमार ने अतिथियों डॉ. राकेश के. मिश्रा और डॉ. वी.पी. कांबोज, निदेशक मंडल, बायोटेक कंसोर्टियम ऑफ इंडिया लिमिटेड, पूर्व निदेशक, सीएसआईआर-केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान और समारोह के अध्यक्ष का परिचय दिया। इसके बाद "द राइज ऑफ जीनोमिक्स: अपॉर्चुनिटीज एंड चैलेंजेस" पर व्याख्यान दिया गया। उन्होंने कहा कि जीवविज्ञान में सबसे आश्चर्यजनक प्रगति जीनोम सूचना की सहजता और सामर्थ्य रही है। यह जानकारी जीवन प्रक्रियाओं में एक अत्यंत व्यापक अंतर्दृष्टि प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि इन अभूतपूर्व अवसरों की संभावना है कि स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से निपटने के तरीके को गेम चेंजर बनाया जाएगा।

अध्यक्षीय भाषण देते हुए, डॉ. वी.पी. कंबोज ने डॉ. राकेश के. मिश्रा को उनकी शानदार प्रस्तुति के लिए बधाई दी और कहा कि जीवन की उत्पत्ति के सिद्धांत इस तथ्य को दोहराते हैं कि लगभग सभी जीवन रूपों में पांच मूल तत्वों की उत्पत्ति की समानता है। उन्होंने कहा कि जीनोमिक अनुसंधान में उन्नति का उपयोग करते हुए सस्ती वैयक्तिकृत चिकित्सीय आहार तैयार करना आज की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि वायु और जल प्रदूषण की बढ़ती चिंता को आने वाले पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और हरियाली वातावरण सुनिश्चित करने के लिए सभी हितधारकों से अधिक ठोस प्रयास की आवश्यकता है।

डॉ. विनय के. खन्ना, वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक, सीएसआईआर-आईआईटीआर ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया।

सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-आईआईटीआर), लखनऊ में मुख्य परिसर में वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) का 78वां स्थापना दिवस समारोह मनाया गया।

डॉ. देवेंद्र परमार, मुख्य वैज्ञानिक, सीएसआईआर-आईआईटीआर ने मुख्य अतिथि, प्रोफेसर लाल चंद राय, विशिष्ठ प्रोफेसर, वनस्पषति विज्ञान विभाग, इंस्टीनट्यूट ऑफ साइंस, काशी हिन्दू विश्वेविद्यालय, वाराणसी एवं  समारोह सभा का स्वागत करते हुए बहुत पहले की उस अवधि को याद किया जिसमें वर्ष 1942 में वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की स्थापना हुई थी। उन्होंने आगे कहा कि संगठन ने अपनी स्थापना से अब तक एक लंबा सफर तय किया है, तथा इन वर्षों में समाज को अनेक योगदान दिया है। इसके उपरांत डॉ. डी. कार चौधुरी, मुख्य वैज्ञानिक, सीएसआईआर-आईआईटीआर एवं  अध्यक्ष, आयोजन समिति ने मुख्य अतिथि का परिचय दिया। मुख्य अतिथि प्रोफेसर लाल चंद राय ने स्थापना दिवस व्याख्यान दिया। सभा को संबोधित  करते हुए मुख्य अतिथि ने शैवाल(एल्गी) पर अपने किए कार्य एवं इस कार्य-यात्रा में किए गए प्रयासों के बारे अवगत कराया, जिसका उपयोग धातु विषाक्तता का अध्ययन करने के लिए एक मॉडल प्रणाली के रूप में किया।

प्रोफेसर आलोक धावन, निदेशक, सीएसआईआर-आईआईटीआर  ने समारोह की अध्यक्षता की। अपने अध्यक्षीय व्याख्यान  देते हुए प्रोफेसर धावन ने प्रारंभ से अब तक सीएसआईआर द्वारा विकसित अनेक  प्रौद्योगिकियों/तकनीकों के बारे में सभा को अवगत कराया। उन्होंने आगे कहा कि सोनालिका ट्रैक्टर, निर्वाचन प्रक्रिया में प्रयुक्त अमिट स्याही, तेजस एवं सारस विमान हेतु स्वदेशी विकसित अत्याधुनिक तकनीकें, सड़क निर्माण एवं भवन निर्माण प्रक्रिया में सुधार, सीएसआईआर द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों/तकनीकों में से कुछ हैं। उन्होंने इस अवसर पर संस्थान में आए छात्रों से इस खुला दिवस (ओपेन डे)  का पूर्ण उपयोग कर संस्थान की प्रयोगशालाओं का भ्रमण करने तथा संस्थान के वैज्ञानिकों के साथ बातचीत करने का आग्रह किया।

संस्थान ने 25 वर्ष की सेवा पूर्ण करने वाले एवं पिछले वर्ष सेवानिवृत हुए अपने कर्मचारियों को सम्मानित किया। सीएसआईआर के कर्मचारियों के बच्चों के लिए आयोजित निबंध लेखन प्रतियोगिता हेतु पुरस्कार भी प्रदान किए गए। इस अवसर पर मुख्य अतिथि, प्रोफेसर लाल चंद राय ने सीएसआईआर-आईआईटीआर अल्मनाई एसोसिएशन वेबपेज भी लॉन्च किया। एसोसिएशन के वर्तमान वैज्ञानिक समुदाय एवं  संस्थान के पूर्व छात्रों हेतु एक विश्वसनीय नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करने की आशा है।

सीएसआईआर-आईआईटीआर द्वारा विकसित/प्रौद्योगिकियों के योगदान की एक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई और अत्याधुनिक अनुसंधान एवं विकास के प्रत्यक्ष अनुभव ग्रहण करने हेतु संस्थान लखनऊ के छात्रों एवं नागरिकों हेतु पूर्ण रूप से खुला रहा। शहर के विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों के लगभग 150 छात्रों ने संस्थान में आयोजित प्रदर्शनी का दौरा किया तथा वैज्ञानिकों के साथ बातचीत की।

डॉ. के.सी. खुल्बे, वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक, सीएसआईआर-आईआईटीआर एवं  कार्यक्रम के   संयोजक ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

सी.एस.आई.आर.-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थासन (सीएसआईआर-आईआईटीआर), लखनऊ में दिनांक 11  मई, 2018 को  राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस का आयोजन  किया गया। हमारे दैनिक जीवन में विज्ञान के महत्व को दोहराए जाने और छात्रों को विज्ञान के प्रति प्रोत्साहित करने हेतु  राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस प्रत्येक वर्ष  11 मई को देश में  मनाया जाता है। यह पोखरण परमाणु परीक्षण तिथि 11 मई, 1998  की यादगार के रूप में  इस दिन मनाया जाता है। इस दिन स्कूल एवं कालेज के विद्यार्थियों के भ्रमण  हेतु संस्थान में खुला दिवस (ओपेन डे) रहा।

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर प्रोफ़ेसर विनायक नाथ, सह संस्थापक, वेंचर केटालिस्ट, उत्तर प्रदेश ने  संस्थान के  प्रोफ़ेसर एसएच ज़ैदी सभागार में प्रौद्योगिकी दिवस व्याख्यान दिया। श्री नाथ ने सतत विकास सुनिश्चित करने के लिए सफल स्टार्ट-अप में प्रासंगिक प्रौद्योगिकियों की भूमिका पर प्रकाश डालने वाली  स्पष्ट प्रस्तुति दी। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक प्रोफेसर आलोक धावन ने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि यह व्याख्यान बहुत ही प्रेरक है, आशा है कि संस्थान के युवा वैज्ञानिक एवं छात्र इससे  प्रेरणा लेंगे।

संस्थान के जिज्ञासा कार्यक्रम के एक भाग के रूप में (युवा पीढ़ी को अनुसंधान एवं विकास की ओर आकर्षित करने हेतु) , सूर्या  पब्लिक स्कूल, सुल्तानपुर और केन्द्रीय विद्यालय अलीगंज तथा  सीआरपीएफ स्कूल की  शाखाओं के 300 से अधिक छात्रों ने संस्थान के इनोवेशन एंड ट्रांसलेशन रिसर्च (सीआईटीएआर) केंद्र का दौरा किया। विद्यार्थियों ने  संस्थान के इनोवेशन सेंटर में होने वाले आधुनिकतम अनुसंधान का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त किया  एवं सेंटर में कार्यरत वैज्ञानिकों से  बातचीत भी किया। 

इस अवसर पर श्री जितेंद्र शर्मा एमडी एवं सीईओ, आंध्र प्रदेश मेडटेक जोन लिमिटेड ने सीएसआईआर-आईआईटीआर द्वारा विकसित जल शोधन प्रौद्योगिकी ओ-नीर में अपनी गहरी रूचि व्यक्त की और संस्थान के साथ एक तकनीकी हस्तांतरण हेतु एमओयू हेतु  रुचि दिखाई।

किसी भी देश के नागरिक उस देश द्वारा की गई वैज्ञानिक प्रगति के प्रत्यक्ष लाभार्थी होते हैं और यही इस वर्ष के राष्ट्रीय विज्ञान दिवस समारोह  "विज्ञान के लिए लोग और लोगों के लिए विज्ञान" का  विषय है। 

सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-आईआईटीआर), लखनऊ में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2019 का समारोह का शुभारंभ संस्थान द्वारा विकसित अत्याधुनिक अनुसंधान और प्रौद्योगिकियों के प्रदर्शन के साथ प्रारम्भ हुआ। इसके बाद किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ के कुलपति प्रोफेसर एम॰ एल॰ बी॰ भट्ट द्वारा एक लोकप्रिय व्याख्यान प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति चाहे किसी भी विषय को चुने, उसकी सफलता के लिए वैज्ञानिक स्वभाव को विकसित करना आवश्यक है। प्रोफेसर भट्ट ने दर्शकों को याद दिलाया कि देश के पूर्व राष्ट्रपति, भारत रत्न डॉ॰ ए॰पी॰जे॰ अब्दुल कलाम ने युवा प्रज्वलित दिमागों को हमेशा "ड्रीम बिग टू अचीव बिग" के लिए प्रोत्साहित किया।

इससे पहले, सीएसआईआर-आईआईटीआर के मुख्य वैज्ञानिक डॉ॰ डी॰ कार चौधुरी ने सभा का स्वागत करते हुए छात्रों को स्मरण कराया कि नोबेल पुरस्कार विजेता और भारतीय भौतिक विज्ञानी सर चंद्रशेखर वेंकट द्वारा 28 फरवरी 1928 को रमन प्रभाव की खोज के लिए हर साल 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है। अपनी अध्यक्षीय टिप्पणी देते हुए, सीएसआईआर-आईआईटीआर के मुख्य वैज्ञानिक डॉ॰ पूनम कक्कड़ ने छात्र समुदाय से आग्रह किया कि वे अपने जिज्ञासु दिमाग को विश्व में बेहतर मानव स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित वातावरण के बारे में जागरूकता पैदा करने और एक बेहतर स्थान बनाने के तरीकों और साधनों पर ध्यान केंद्रित करें और इस दिशा में निरंतर प्रयास करें। इस अवसर पर संस्थान सुबह 10 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक आम जनता एवं छात्रों के लिए खुला रहा। शहर स्थित स्कूलों और कॉलेजों के 200 से अधिक छात्रों ने संस्थान की प्रयोगशालाओं का दौरा किया और वैज्ञानिक कर्मचारियों के साथ बातचीत भी की।

आयोजन समिति के संयोजक डॉ॰ रवि राम के धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। 

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