Annual Events

हिंदी सप्ताह - 2021 का उद्घाटन समारोह

सी.एस.आई.आर.-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान, लखनऊ में दिनांक 14 सितंबर, 2021 को हिंदी सप्ताह के उद्घाटन समारोह का ऑनलाइन आयोजन किया गया। डॉ. वी.पी. शर्मा, मुख्य वैज्ञानिक व राजभाषा अधिकारी, सीएसआईआर-आईआईटीआर ने हिंदी सप्ताह का उद्घाटन किया। इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए डॉ. शर्मा ने कहा कि हिंदी दिवस, हिंदी कार्यान्वयन के बारे में चिंतन, मंथन करने और राजभाषा के बारे में संकल्प लेने का दिन है। उन्होंने कहा कि हिंदी बहुत सरल, मीठी और अनूठी भाषा है। इसके माध्यम से हम सभी प्रकार की प्रगति प्राप्त कर सकते हैं। हिंदी में हम अपने भावों और विचारों को बहुत सुंदर ढंग से व्यक्त कर सकते हैं। वैज्ञानिक एवं अन्य सभी कार्य हिंदी भाषा में किए जा सकते हैं, बस हमें दृढ़ संकल्प लेने की आवश्यकता हैं। कार्यालयी और अपने दैनिक कार्यों में हिंदी में बोलें, हिंदी में लिखें। हिंदी भाषा ने अनेकता को एकता में बांधने हेतु एक सूत्र के रूप में कार्य किया है। हिंदी भाषा की उन्नति देश की उन्नति है। डॉ. शर्मा ने कहा कि पर्यावरण, प्रदूषण और स्वास्थ्य के क्षेत्र में  संस्थान की बड़ी भूमिका है। हमारा संस्थान वार्षिक प्रतिवेदन, छमाही राजभाषा पत्रिका "विषविज्ञान संदेश", विषविज्ञान शोध पत्रिका, आदि का हिंदी में प्रकाशन कर रहा है। इसके साथ-साथ “विषविज्ञान शब्दावली” और “विषविज्ञान के नए आयाम” नामक पुस्तक का प्रकाशन भी किया गया है। पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण कम करने के उपाए प्लास्टिक के सुरक्षित उपयोग एवं जल संरक्षण आदि के बारे में संस्थान द्वारा हिंदी में अनेक लघु पुस्तकें/विवरणिकाएं प्रकाशित की गई हैं। संस्थान के हिंदी कार्यान्वयन को उच्च स्तर पर सराहना भी मिली है। संस्थान को  हिंदी कार्यान्वयन हेतु अनेक पुरस्कार पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। अभी हाल में मिले पुरस्कार विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। संस्थान को क्षेत्रीय राजभाषा पुरस्कार हेतु वर्ष 2018-19 के लिए तृतीय और वर्ष 2019-20 के लिए  द्वितीय पुरस्कार हेतु चयन किया गया है। संस्थान की राजभाषा पत्रिका "विषविज्ञान संदेश" को भारत सरकार, गृह मंत्रालय से राजभाषा कीर्ति पुरस्कार योजना वर्ष 2019-20 में ‘क’ क्षेत्र के लिए द्वितीय पुरस्कार प्राप्त हुआ है। डॉ. आलोक पाण्डेय, प्रधान  वैज्ञानिक, सीएसआईआर–आईआईटीआर ने आधार व्याख्यान देते हुए कहा कि हिंदी दिवस, हिंदी कार्यान्वयन के बारे में गंभीरता से सोचने, योजनाएं बनाने एवं योजनाओं को मूर्तरूप देने हेतु संकल्प लेने का  दिन है। हमारे संस्थान का कार्य क्षेत्र विज्ञान है। विज्ञान, अनुसंधान और प्रौद्योगिकी से संबंधित कार्यों में हिंदी भाषा का प्रयोग एक चुनौती है, परंतु यह असंभव नहीं है। हिंदी बहुत सरल भाषा है एवं इसका शब्द भंडार बहुत समृद्ध है। अनेक भाषाओं के शब्दों को सहजता से आत्मसात करने की इसमें विशाल क्षमता है। हिंदी ने अरबी, तुर्की, फारसी, पुर्तगाली और अंग्रेजी आदि भाषाओं के अनगिनत शब्दों को इस प्रकार आत्मसात कर लिया है कि वे मूल हिंदी जैसे प्रतीत होते हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञान और इंजीनियरिंग आदि विषयों की शिक्षा हिंदी माध्यम से दी जाए और उच्च कक्षाओं की पाठ्य पुस्तकों का हिंदी रूपांतरण उपलब्ध हो तथा शोध संस्थानों में हिंदी का प्रयोग बढ़ाया जाए। हिंदी समभाव का उदाहरण है, जैसा बोलते हैं वैसा ही लिखते हैं। आज के व्यावसायिक वातावरण में हम सभी को किसी भी मंच से हिंदी बोलने में संकोच नहीं करना चाहिए। हिंदी विचारों की अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम है। हमारे देश और समाज के लिए हिंदी का विकास बहुत ही आवश्यक है। भाषा अपने विकास में अन्य भाषाओं से शब्द लेती है और इसी क्रम में हिंदी भी अन्य भाषाओं के शब्दों को तेज़ी से आत्मसात कर रही है। आज के प्रगतिशील समाज में मोबाइल पर संदेश भेजने में परिवर्तित होती हिंदी को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। परिवर्तित होती हिंदी को समझें और इसके इस नए स्वरूप को स्वीकार करें। डॉ. ज्ञानेन्द्र मिश्र, नियंत्रक, वित्त एवं लेखा, सीएसआईआर-आईआईटीआर ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसी सरल हिंदी बोलें और लिखें जिसे सभी समझ जाएं। भाषा के बारे में हमारा विचार व्यापक होना चाहिए। भाषा परिवर्तनशील होती है और समय के साथ परिवर्तित होती रहती है। शब्द नहीं बदलते परंतु उनके अर्थ बदल जाते हैं। उन्होंने कार्यालय के कार्यों में हिंदी कार्यान्वयन पर बल दिया। श्रीमती कुसुमलता, अनुभाग अधिकारी (सा.) ने समारोह का संचालन किया और सभी को राजभाषा की प्रतिज्ञा दिलाई। श्री के पी शर्मा, प्रशासन नियंत्रक, सीएसआईआर-आईआईटीआर ने अवगत कराया कि हिंदी सप्ताह (14-20 सितंबर, 2021) के दौरान कार्यदिवसों में संस्थान में विभिन्न प्रतियोगिताओं: प्रश्नोत्तरी, स्लोगन, वाद-विवाद, आशुभाषण, हिंदीतर भाषी का हिंदी ज्ञान, लेख, अनुवाद, प्रस्तुतीकरण, कविता/कहानी की रचना आदि का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने   संस्थान  के कर्मचारियों और छात्रों से  प्रतियोगिताओं में उत्साह पूर्वक प्रतिभगिता करने हेतु अनुरोध भी किया। समारोह के अंत में श्री शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। 


हिंदी सप्ताह - 2021 का पुरस्कार वितरण एवं समापन समारोह

दिनांक 20 सितंबर, 2021 को पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। कोविड-19 से सुरक्षा के कारण विभिन्न प्रभागों के प्रमुखों एवं वैज्ञानिकों तथा पुरस्कार विजेताओं के अतिरिक्त शेष स्टाफ सदस्य एवं छात्रगण कार्यक्रम में ऑनलाइन सम्मिलित हुए। इस अवसर पर श्री दिलीप कुमार, आई.आर.एस., विशेष सचिव, बिहार सरकार एवं सीएमडी, बिहार स्टेट फाइनेंशियल कॉर्पोरेशन मुख्य अतिथि थे। श्री दिलीप कुमार ने अपने संदेश में कहा कि देश की प्रगति में वैज्ञानिकों की महत्वपूर्ण भूमिका है और भाषा को लेकर अनुसंधान में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित असमिया, उड़िया, गुजराती, तमिल, संथाली, संस्कृत और बांग्ला, आदि सभी 22 भाषाओं के शब्दों को हमें सीखना चाहिए और आवश्यकता अनुसार इनके शब्दों को हिंदी में सम्मिलित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे देश की विभिन्न बोलियाँ और भाषाएं हमारी मजबूती का प्रतीक और परिचायक हैं और हमारे देश के विकास में सभी का महत्वपूर्ण योगदान है। इस अवसर पर श्री दिलीप कुमार द्वारा लिखित पुस्तक "अप–डाउन में  फंसी ज़िंदगी"  सीएसआईआर-आईआईटीआर को भेंट किया। मुख्य अतिथि महोदय ने संबोधन से पूर्व हिंदी सप्ताह (14-20 सितंबर, 2021) के दौरान संस्थान में आयोजित वाद-विवाद, आशुभाषण, हिंदीतर भाषी का हिंदी ज्ञान, लेख, अनुवाद, प्रस्तुतीकरण, कविता/कहानी की रचना आदि प्रतियोगिताओं के विजयी प्रतिभागियों को एवं प्रोत्साहन योजना हेतु पुरस्कार प्रदान किए। इससे पूर्व श्री चन्द्र मोहन तिवारी, हिंदी अधिकारी, सीएसआईआर-आईआईटीआर ने सभा का स्वागत किया। डॉ. वी.पी. शर्मा, मुख्य वैज्ञानिक व राजभाषा अधिकारी, सीएसआईआर-आईआईटीआर ने मुख्य अतिथि महोदय का परिचय देते हुए बताया कि श्री दिलीप कुमार, आईआरएस ने भाषा की पद एवं गद्य दोनों शैलियों में बहुत कार्य किया है। विभिन्न समाचार पत्र, दूरदर्शन और पत्रिकाओं आदि में आपके लेख और कविताएं प्रकाशित होते रहते हैं, हिंदी भाषा के क्षेत्र में आपका योगदान सराहनीय है। डॉ. एन. मणिक्कम, मुख्य वैज्ञानिक, सीएसआईआर-आईआईटीआर ने समारोह की अध्यक्षता  किया। उन्होंने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि व्यक्ति के जीवन  में भाषा का  बहुत अधिक महत्व है। भाषा ही व्यक्तियों को जोड़ती है। हिंदी भाषा की उन्नति  देश की उन्नति है। हमारे संस्थान ने हिंदी भाषा में बहुत कार्य किया है। संस्थान को अनेक पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। संस्थान का अभी हाल में क्षेत्रीय राजभाषा पुरस्कार वर्ष 2018-19 के लिए तृतीय और वर्ष 2019-20 के लिए द्वितीय हेतु चयन किया गया है। संस्थान की राजभाषा पत्रिका ‘विषविज्ञान संदेश’ को भारत सरकार, गृह मंत्रालय से राजभाषा कीर्ति पुरस्कार योजना वर्ष 2019-20 में ‘क’ क्षेत्र के लिए अखिल भारतीय स्तर पर द्वितीय पुरस्कार प्राप्त हुआ है। उन्होंने संस्थान के स्टाफ से हिंदी में और अधिक कार्य करने हेतु अनुरोध भी किया। श्री के. प्रसाद शर्मा, प्रशासन नियंत्रक, सीएसआईआर-आईआईटीआर ने समारोह के अंत में धन्यवाद ज्ञापन दिया। 

The first ever World Environment Day, as designated by the UN General Assembly, was celebrated on June 05, 1974. Ever since, this day has been marked to create a global platform to focus attention on a wide variety of environmental issues such as air and plastic pollution, illegal wildlife trade, sustainable consumption, global warming, food security, among others. These celebrations also play a role in shaping environmental policies across nations. The year 2021 marks the beginning of the United Nations Decade on Ecosystem Restoration to rededicate efforts towards reimagining, recreating, and restoring the environs that support life. 

Delivering the 25th Dr. C.R. Krishnamurthy Memorial Oration at CSIR-Indian Institute of Toxicology Research (CSIR-IITR) Lucknow, through the virtual mode, Padma Bhushan Sri Anil Prakash Joshi, founder of Himalayan Environmental Studies and Conservation Organization (HESCO) said that the need of the hour is to ensure the development of environmentally sustainable technologies. Ensuring Prosperity is more important than Development. While development tends to create disparity, Prosperity is more equitable and all encompassing, he said. This oration is organized every year by the institution in the memory of its second Director, as a part of the World Environment Day celebrations. Sri Joshi, a botanist by training and a well known green activist reiterated the importance of inclusive growth of a community involving both economy and ecology. His concept “Local need, meet locally” has become popular across the mountainous and hilly regions of India. Reiterating the role of Gross Environment Product in ensuring the very existence of life forms, he said that GDP cannot function in isolation without GEP.

Presiding over the function, Professor S.K. Barik, Director, CSIR-IITR highlighted the contributions made by CSIR–IITR towards a safer and secure post-Covid world. Sharing his thoughts, he recollected the role of Dr. C.R. Krishnamurthy in laying the strong foundations of Occupational Health and Environmental Toxicology on which the Institute now focuses.

During the event, the institute also released the annual report on Pre Monsoon Assessment of Ambient Air Quality of Lucknow City and declared the prize winners of an online painting competition for children of CSIR employees that was conducted earlier in the week as a part of the celebrations. 

CSIR–Indian Institute of Toxicology Research (CSIR-IITR), the premier toxicology institute in the country, celebrated its 56th Annual Day on November 15, 2021. Given the present scenario of the Covid19 Global Pandemic, the celebrations were organized in the hybrid mode with live streaming for the online participants.

The highlight of the celebrations was the 25th S.H. Zaidi Memorial Oration delivered by Dr Richard Woychik, Director, National Institute of Environmental Health Sciences (NIEHS) and National Toxicology Program (NTP), USA. Dr Woychik had the audience spellbound during his lecture detailing the mission of the NIEHS in discovering the role of the environment in human health. NIEHS strives to promote innovative research in order to improve public health and prevent disease and disability, he said. The oration provided an overview of the intramural and extramural scientific activities focussing on strategic approaches to the challenges of global environmental health.

The institute’s Annual Report was presented by Professor S.K. Barik, Director, CSIR–IITR and the results of the “Empowering Pupil Innovation and Creativity (EPIC)-2021 programme, conducted under the CSIR “Jigyasa” initiative were declared on the occasion. In his address Professor Barik apprised the gathering about several success stories of the institute in the year gone by, especially mentioning the Institute’s contribution in the fight against the scourge of Covid-19. The institute is also focussing on cutting edge new age technologies of Machine Learning and Artificial Intelligence. The Post Monsoon Environment Status Report of Lucknow City was also released.

Earlier, Dr N Manickam, Chief Scientist, CSIR–IITR introduced the guest and Dr Vinay K Khanna, Senior Principal Scientist, CSIR–IITR proposed the vote of thanks.

The entire world is currently going through a tumultuous period with the scourge of the Covid-19 global pandemic spreading far and wide. History is replete with numerous examples of how Science has improved the very existence and standard of living over centuries. In a country as large as ours, a strong foundation laid on Science and Technology is essential to ensure better lives for a billion-plus people. Echoing similar thoughts, Dr Sanjay Singh, CEO Gennova Biopharmaceuticals Limited, Pune delivered the CSIR Foundation Day Lecture titled, “Scientific Temper in Changing Times”. He was speaking at the 79th Foundation Day Celebrations of The Council of Scientific and Industrial Research at CSIR–Indian Institute of Toxicology Research (CSIR-IITR). Recalling the words of the first Prime Minister of the country, Pandit Jawaharlal Nehru, he said that the search for new knowledge and capacity to challenge pre-conceived notions in the face of new evidence is key to meet the unmet needs of the country, towards making a self-reliant India, the atma nirbhar Bharat. Going by these lines, He said that Gennova Biopharmaceuticals is currently working towards HGC019, an mRNA vaccine as a preventive and protective measure against COVID-19.

The celebrations were in virtual mode given the pandemic situation and several senior members of the scientific community, former Director-General and former Directors of CSIR Institutions, including Professor Samir K Brahmachari, Former Director General, CSIR; Dr VP Kamboj, Former Director, CSIR-CDRI; Dr PK Seth, Former Director, CSIR-IITR; Dr Abhay Deshpande, Global Director, Innovation & Strategy Jai Research Foundation; Dr RC Srimal, Former Director, CSIR-IITR; and Dr MK Bhat, Director, NCCS Pune graced the occasion.

Dr Devendra Parmar, Chief Scientist, CSIR-IITR, and Chairperson, Organizing Committee, welcomed the gathering and introduced the speaker.

The function was presided over by Professor Alok Dhawan, Director CSIR-IITR. In his remarks, Professor Dhawan said that the role of CSIR in the battle against the global pandemic of Covid-19 has been phenomenal with contributions in different spheres like diagnostics, treatment, hospital equipment, supply chain, genome sequencing, etc, to name a few. He also mentioned that the Summer Training Programmes at CSIR Laboratories is a much sought after activity among the student community at large. In these challenging times, CSIR-IITR, along with sister laboratories successfully conducted the "Summer Research Training Programme–2020" (SRTP-2020) for 75 students in the online mode, he said. 

The Institute also felicitated its employees completing 25 years of service and those who superannuated in the previous year. Prizes were also given away to children of CSIR-IITR employees who have excelled in academics during the previous year.

Dr Ravi Ram Kristipati, Principal Scientist, CSIR-IITR, and Convener of the programme delivered the vote of thanks.

Every year, the 11th day of May is celebrated as National Technology Day, as India successfully tested nuclear bombs in Pokhran on May 11, 1998. The celebrations highlight the important role of technological innovations in our daily lives and encourage students to embrace Science as a career option. The event also highlights the significant milestones of our scientists and engineers in the field of science and technology. 

CSIR-Indian Institute of Toxicology Research (CSIR-IITR), Lucknow celebrated the National Technology day with all students, staff, and scientists through social networking platform. In the opening remarks, Professor Alok Dhawan, Director, CSIR-IITR, highlighted the contributions of CSIR on the advancement of science and technology in the country. The ‘Technology Day Lecture’ was delivered by Professor Thalappil Pradeep, Institute Professor, and Professor of Chemistry, Department of Chemistry, Indian Institute of Technology Madras, a pioneer in the area of molecular materials and surfaces. Keeping in mind the present situation, he delivered an intriguing lecture on entitled “Innovations in academic institutions during and after the pandemic”. Expressing his views on the occasion, he said that looking at the pandemics of past, science, and technology has always provided the solution. He added that “the world today needs sustainable solutions such as sustainable livelihood, food, new packaging material, self-contained homes with more focus on health”. The other side of the coin is that during the crisis situation, fundamental human values have been strengthened. People became united and collectivism has increased. In the closing remarks, Professor Alok Dhawan, Director CSIR-IITR urged the student community to convert their passion into their purpose and eventually into their profession. He added that “Indian scientific community is thriving hard to culminate this pandemic disease and expressed hope that with the collective efforts the situation will improve soon”.

Challenge the Status Quo, Always ask Why / How

This was the “Take Home Message” of the National Science Day Lecture delivered by Lt. Gen. (Dr) Bipin Puri PVSM, VSM (Retd), Vice-Chancellor, King George’s Medical University, Lucknow during the National Science Day 2021 celebrations at CSIR-Indian Institute of Toxicology Research (CSIR–IITR), held today.

In his address, Lt Gen Puri said that a judicious combination of Out of the box thinking, Enterprising initiatives, and Hard work is the key to scientific success. Quoting the much loved former President of our country, Dr APJ Abdul Kalam, he said that Science is a beautiful gift to humanity and one should always strive to use it for the larger good of all of mankind. Dr Puri reiterated that the recently introduced Science, Technology, and Innovation Policy (STIP) will lay the foundation for successful pursuits of the scientific community of this great country.

Earlier, in his welcome address, Dr N Manickam, Chief Scientist, CSIR–IITR, and Chairman, Organizing Committee, spoke about the genesis of Science Day celebrations in the country. India celebrates National Science Day on 28th February every year to commemorate the discovery of the Raman Effect by Nobel laureate and Indian Physicist Sir Chandrashekhara Venkata Raman on 28th February 1928.

Delivering the Presidential address, Professor S.K. Barik, Director CSIR–IITR opined that the potential of any scientific discovery/invention is only realized when it contributes towards fulfilling human needs and alleviating obstacles in the path to progress. He exhorted the scientific community to rededicate themselves towards achieving the goal of “Atmanirbhar Bharat” 

Dr K. Ravi Ram, Principal Scientist, CSIR–IITR and Convener, Organizing Committee, proposed the vote of thanks.

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