प्रेस विज्ञप्ति

इमर्ज 2017 की सफल शुरुआत - सीएसआईआर-भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान, लखनऊ संस्थान में स्नातक छात्रों को सशक्त बनाने के लिए कार्यक्रम

सीएसआईआर-भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान, लखनऊ द्वारा 18 जुलाई, 2017 को एक कार्यक्रम ‘इमर्ज 2017’ सफलतापूर्वक प्रारम्भ किया गया। यह अंडर ग्रेजुएट छात्रों के लिए विषयगत एस एंड टी कार्यशालाओं पर सैद्धांतिक के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान को बेहतर बनाने के लिए एक अनूठा अवसर है। इस तीन दिवसीय कार्यशाला (18-20 जुलाई 2017) में आणविक जीवविज्ञान, नैनोटेक्नोलॉजी, उन्नत माइक्रोस्कोपी और बायोइनफॉरमैटिक्स 2017 विषयगत एस एंड टी जानकारी दी जाएगी। कार्यशाला का प्रारम्भ डा रामकृष्णन पार्थसारथि समन्वयक द्वारा भाग लेने वाले स्नातक छात्रों का स्वागत से हुआ। इस कार्यक्रम का उदघाटन डॉ पूनम कक्कर, मुख्य वैज्ञानिक डा कार चौधरी, मुख्य वैज्ञानिक, डॉ देवेंद्र परमार, मुख्य वैज्ञानिक और अध्यक्ष, मानव संसाधन सेल, सीएसआईआर-आईआईटीआर द्वारा किया गया। सम्मानित पैनल के सदस्यों ने प्रतिभागियों को विज्ञान की जरूरतों को हल करने के लिए जुनून के साथ विज्ञान का पथ अपनाते हुए प्रौद्योगिकियों के विकास करने के लिए प्रोत्साहित किया। सीएसआईआर-आईआईटीआर वैज्ञानिकों और उनकी टीम के सदस्यों के विशेषज्ञ मार्गदर्शन में विभिन्न विषयों पर सभी चार कार्यशालाएं समानांतर चल रही हैं। छात्र प्रतिभागियों ने उत्साह से वर्तमान में जीवन विज्ञान और नैनो अनुसंधान के क्षेत्र में उपयोग होने वाले विभिन्न उन्नत उपकरणों और तकनीकों का इस्तेमाल सीखा।

सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान, लखनऊ को राजभाषा पत्रिका "विषविज्ञान संदेश" के अंक 26 के प्रकाशन हेतु प्रथम पुरस्कार और हिंदी में कार्यालयी कार्यों में उत्कृष्ट प्रदर्शन का द्वितीय पुरस्कार प्राप्त हुआ

सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान, लखनऊ को संस्थान की राजभाषा पत्रिका "विषविज्ञान संदेश" के अंक 26, वर्ष 2016-17 के प्रकाशन हेतु प्रथम पुरस्कार और अक्तूबर से मार्च छमाही (2016-17) की अवधि में राजभाषा हिंदी में कार्यालयी कार्यों में उत्कृष्ट प्रदर्शन का द्वितीय पुरस्कार प्राप्त हुआ। पुरस्कार के रूप में शील्ड और प्रमाणपत्र प्रदान किया गया। यह भी उल्लेखनीय है कि संस्थान की राजभाषा पत्रिका को लगातार तीसरी छमाही में प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ है। यह पुरस्का्र भाकृअनुप-भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ में आयोजित भारत सरकार, राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (कार्यालय-3), लखनऊ की दिनांक 23.06.2017 को छमाही बैठक में प्रदान किया गया। संस्थान की ओर से निदेशक, प्रोफेसर आलोक धावन, प्रशासन नियंत्रक, श्री अनिल कुमार तथा हिंदी अधिकारी, श्री चन्द्रा मोहन तिवारी ने इस पुरस्कार को प्राप्त किया।

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