निदेशक की डेस्क

सी.एस.आई.आर.-आई.आई.टी.आर., एक दूरदर्शी का सपना था, जो कि 1965 में औद्योगिक विषविज्ञान अनुसंधान केन्द्र (आई.टी.आर.सी.) के रूप में एक वास्तविकता बन गया। संस्थापक निदेशक, प्रो सिब्ते हसन जैदी ने देश में स्वतंत्रता के बाद तेजी से बढ़ते हुए औद्योगीकरण की स्थिति में औद्योगिक श्रमिकों की स्वास्थ्य समस्याओं के निराकरण के लिए शोध करने हेतु आवश्यकता का संज्ञान लिया। अनुपयुक्त एवं अननुरूप रसायनों और उर्वरक के उपयोग से स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव से देश की संवृद्धि और विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसलिए धरणीय औद्योगिक विकास के लिए रणनीति विकसित करने के अध्ययन की आवश्यकता थी। आई.आई.टी.आर. ने देश की बढ़ती अर्थव्यवस्था में औद्योगिक कार्य-बल की स्वास्थ्य समस्याओं के निवारण में राष्ट्रीय महत्व प्राप्त किया। प्रारंभिक वर्षों के दौरान किए गए अग्रणी अध्ययन, खनिकों के स्वास्थ्य से सीधे जुड़े मामलों हेतु विशेष रूप से सांस की बीमारियों के लिए किए गए थे।

प्रगतिशील विकासात्मक मार्ग का अनुसरण करके संस्थान नए कार्यक्लाप और विशेषज्ञता के साथ सफलता अर्जित किया है। आज विषविज्ञान अनुसंधान परिवर्तन के दोराहे पर खड़ा है जिसमें साठ के दशक के अंतिम काल के पारंपरिक अध्ययन, जंतु प्रयोग और जंतुओं के ऊतकों के हिस्टोपैथोलॉजिकल अवलोकन से आगे बढ़कर आज अत्याधुनिक जीवविज्ञान और रसायन विज्ञान के अंतर्विषयक क्षेत्र में ओमिक और पोस्ट-ओमिक प्रौद्योगिकियों तक पहुंच चुका है। बायोमार्कर्स की अवधारणा, जंतु-मॉडल के विकल्प, गणितीय मॉडलिंग और प्रीडिक्टिव विषविज्ञान, विभिन्न मैट्रिक्स में विषाक्त / अपमिश्रक / पर्यावरिक रसायनों की जाँच करना और जाँच करने हेतु विधि विकसित करना जैसे कुछ कार्य हैं जिससे मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के संरक्षण में विषाक्तता अनुसंधान तात्विक हो जाता है। आई.टी.आर.सी. का भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान (सी.एस.आई.आर.–आई.आई.टी.आर.) के नाम से 2008 में पुनः नामकरण किया गया जिससे मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर हमारे परिवर्तित प्रतिमान में विषविज्ञान की नई सीमाओं में अनुसंधान गतिविधियों को सशक्त बनाया जा सके। सी.एस.आई.आर.–आई.आई.टी.आर. वर्तमान में विषविज्ञान के आला क्षेत्रों जैसे: सिस्टम टोक्सिकोलोजी और स्वास्थ्य जोखिम आकलन; खाद्य, औषधि एवं रासायनिक विषविज्ञान; नियामक विषविज्ञान; पर्यावरण विषविज्ञान और नैनोथेराप्यूटिक्स और नैनोमटीरियल विषविज्ञान में अनुसंधान कार्य कर रहा है। संस्थान नई प्रौद्योगिकियों के सुरक्षित उपयोग और धारणीय विकास के लिए नई रासायनिक इकाइयों, इंजीनियर्ड नैनोमिटेरियल्स और आनुवंशिक रूप से संशोधित उत्पादों की जैविक प्रणाली पर कार्य - विधि के तरीके को समझने हेतु प्रभावी रूप से अग्रसर है। उद्योगों को बेहतर सेवा देने और वैश्विक स्तर पर उत्पाद सुरक्षा की स्वीकृति के लिए, सीएसआईआर–आईआईटीआर को विषविज्ञान संबंधी विषयों के विभिन्न पहलुओं में अपनी बृहत विशेषज्ञता के कारण एनएबीएल प्रमाणन और हाल ही में जीएलपी प्रमाणन से सम्मानित किया गया है।

सी.एस.आई.आर.-आई.आई.टी.आर. वेबसाइट नई सहस्त्राब्दि में हमारे मिशन का एक प्रतिबिंब है।



प्रोफेसर आलोक धावन

निदेशक, सीएसआईआर-आईआईटीआर

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