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सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थानन में "हिंदी सप्ताह 2018" के उद्घाटन समारोह का आयोजन

सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान(सीएसआईआर-आईआईटीआर), लखनऊ में आज दिनांक 14 सितंबर  को प्रातः 10:30 बजे एस.एच. जैदी सभागार में हिंदी सप्तााह के उद्घाटन समारोह का आयोजन किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि श्री राम नाईक, माननीय राज्यपाल, उत्तर प्रदेश थे। सर्वप्रथम माननीय राज्यपाल महोदय ने  दीप प्रज्ज्वलन कर समारोह का शुभारंभ किया। इसके उपरांत सीएसआईआर-आईआईटीआर द्वारा विषविज्ञान विषय पर एक पुस्तक, “विषविज्ञान अनुसंधान के नए आयाम”, संस्थान की छमाही राजभाषा पत्रिका “विषविज्ञान संदेश” के अंक 29 का विमोचन किया तथा इसके साथ-साथ “खाद्य एवं उपभोक्ता सुरक्षा समाधान” वेबसाइट का प्रमोचन (लाँच) किया। इसके अतिरिक्त पेयजल, पॉलीथिन व प्लास्टिक तथा ओनीर पर विवरणिका का भी विमोचन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि महोदय ने अपने संबोधन में कहा कि विषविज्ञान संदेश, विषविज्ञान” अनुसंधान के नए आयाम, इसके अतिरिक्त पेयजल, पॉलीथिन व प्लास्टिक तथा ओनीर, "खाद्य एवं उपभोक्ता सुरक्षा समाधान (फूड एंड कंज़्यूमर सेफ़्टी सल्यूशन- फ़ोकस) पर जो विवरणिका (लघु पुस्तकें) आईआईटीआर द्वारा हिंदी में प्रकाशित की जा रही हैं यह अति प्रशंसनीय कार्य है। हिंदी में प्रकाशित यह सामग्री आम जनता के लिए लाभकारी है। इन विवरणिकाओं का अधिक से अधिक प्रकाशन किया जाना चाहिए जिससे जनता इसका लाभ उठा सके। सीएसआईआर–आईआईटीआर हिंदी भाषा में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। अन्य संस्थानों हेतु यह अनुकरणीय है। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में हिंदी का उपयोग हुआ और आज़ादी मिलने तक उपयोग होता रहा। इसके उपरांत संविधान सभा में देश की राजभाषा कौन हो इस पर बहुत विचार हुआ,  तदुपरांत हिंदी को 14 सितंबर, 1949 को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया गया। आज हिंदी भाषा केवल हिंदी भाषी क्षेत्र तक सीमित न होकर संपूर्ण भारत में फैल चुकी है। आंकड़ों के अनुसार आज लगभग 70 करोड़ लोग हिंदी भाषा प्रयोग कर रहे  हैं। यह संख्या इससे अधिक भी हो सकती है। हिंदी साहित्य की भाषा है। मैं महाराष्ट्र का हूँ परंतु सरलता से हिंदी बोलता हूँ।  हिंदी के सरल शब्दों का प्रयोग करना चाहिए जिससे सभी लोग समझ सकें। हम सभी को विचार करना चाहिए कि हिंदी का और विकास, प्रचार तथा प्रसार कैसे हो। विज्ञान और विधि के क्षेत्र  में हिंदी भाषा संबंधी कार्य और होना चाहिए। सर्वोच्च और उच्च न्यायालय अपने निर्णय हिंदी में प्रकाशित करने हेतु प्रयासरत हैं। 

इस अवसर पर संस्थान के निदेशक, प्रोफेसर आलोक धावन ने अपने संबोधन में विमोचन की जाने वाली पुस्तकों एवं संस्थान के इनोवेशन संबंधी  गतिविधियों के बारे में जानकारी प्रदान करते हुए कहा कि संस्थान के वैज्ञानिकों ने सरल हिंदी भाषा में एक पुस्तक, विषविज्ञान अनुसंधान के नए आयाम  लिखा है। हमने विगत तीन वर्षों के अनुसंधान कार्यों को  हिंदी पत्रिका के माध्ययम से आम लोगों तक पहुँचाया है। आम जनता से संबंधित विषयों पर हिंदी में अनेक विवरणिकाएं प्रकाशित की हैं। पर्यावरण प्रदूषण विषय पर हिंदी माध्यम में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक संगोष्ठियों का सफल आयोजन किया जा चुका है। संस्थान का वार्षिक प्रतिवेदन विगत कई वर्षों से हिंदी में प्रकाशित किया जा रहा है। संस्थान के शोध कार्यों को हिंदी के समाचार पत्रों एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रमुखता से प्रकाशित/प्रसारित किया जाता है, साथ ही डी.डी. किसान चैनल और अन्य चैनलों के माध्यैम से किसानों तक जानकारी पहुँचाई जाती है। हमारे संस्थान को भारत सरकार, गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग द्वारा हिंदी भाषा के कार्यान्वयन के लिए प्रथम पुरस्कार  तथा संस्थान की छमाही राजभाषा पत्रिका विषविज्ञान संदेश को लगातार तीन बार प्रथम पुरस्का‍र प्रदान किए गए हैं एवं कई बार अन्य पुरस्कार भी प्राप्त हुए हैं। अनुसंधान में हम प्रमुख रूप से खाद्य, पेयजल और पर्यावरण के क्षेत्र में कार्यरत हैं। हमारा संस्थान स्वरच्छ। भारत, स्वुस्थ् भारत, स्टार्टअप जैसे कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से योगदान दे रहा है। भारत सरकार के नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत सात स्थािनों पर जल का विश्लेैषण कर रहा है।  

इससे पूर्व डॉ. पूनम कक्कड़मुख्य वैज्ञानिक ने माननीय राज्यपाल महोदय का स्वागत किया ।

संस्थाून के हिंदी अधिकारी श्री चन्द्र  मोहन तिवारी ने  कहा कि हिंदी सप्ताह के दौरान प्रश्नोरत्तेरी (क्विज), स्लोगन (आदर्श-वाक्य), वाद-विवाद, आशुभाषण, हिंदीतर भाषी का हिंदी ज्ञान, लेख, अनुवाद, प्रस्तुतीकरण, कविता/कहानी की रचना और कवि सम्मेलन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा।  प्रतियोगिताओं में वैज्ञानिक, तकनीकी एवं प्रशासनिक अधिकारी/कर्मचारी/शोध-छात्र बढ़-चढ़कर भाग लेते है।  

राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ और डॉ. डी. कार चौधुरी, मुख्य वैज्ञानिक ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

हिंदी सप्ताह 2018 के पुरस्कार वितरण एवं समापन समारोह का आयोजन

सीएसआईआर-आईआईटीआर, लखनऊ में दिनांक 20 सितंबर, 2018 को हिंदी सप्तारह पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। प्रोफेसर आलोक धावन, निदेशक, सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान, लखनऊ ने समारोह की अध्यक्षता किया। निदेशक महोदय ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि आज का दिन विशेष दिन है इसके माध्यम से हम स्टाफ को संपूर्ण वर्ष हिंदी में कार्य करने हेतु प्रोत्साहित करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदी भाषा में लिखने से जो भाव आता है वह अन्य भाषा में नहीं आता। संस्थान में दिनांक 19-09-2018 को आयोजित कवि सम्मेलन में आए कवियों ने देश के महत्वपूर्ण मुद्दों को अपने काव्य के माध्यम से कितनी रोचकता और सरलता से प्रस्तुत किया जो विशेष रूप से प्रशंसनीय है। उन्होंने अवगत कराया कि संस्थान कि राजभाषा पत्रिका “विषविज्ञान संदेश” के निरंतर तीन अंकों 23-24, 25 एवं 26 को भारत सरकार, राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय से प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। कार्यालयी कार्य राजभाषा हिंदी में उत्कृष्ट रूप से करने हेतु प्रथम एवं द्वितीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। जो कि दर्शाता है कि संस्थान में हिंदी कार्यान्वयन का कार्य प्रगति पर है।

डॉ. देवेंद्र परमार, मुख्य वैज्ञानिक, सीएसआईआर-आईआईटीआर ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि संस्थान के स्टाफ एवं शोध छात्रों की रुचि हिंदी भाषा के प्रति बढ़ी है और पहले की अपेक्षा प्रतिभागियों की संख्या काफी बढ़ी है। उन्होंने इसके साथ यह भी कहा कि संस्थान में आयोजित कवि सम्मेलन की स्टाफ द्वारा काफी सराहना की गई है।

श्री चन्द्र मोहन तिवारी, हिंदी अधिकारी ने कार्यक्रम का संचालन किया। हिंदी अधिकारी ने अवगत कराया कि हिंदी सप्ताह के अंतर्गत आयोजित 9 प्रतियोगिताओं हेतु 27 पुरस्कार और संपूर्ण वर्ष के दौरान कार्यालयी कार्य हिंदी में करने हेतु नियमानुसार 11 पुरस्कार प्रदान किए गए।

श्री प्रदीप कुमार, प्रशासनिक अधिकारी ने सभी से राजभाषा में संपूर्ण वर्ष हिंदी में अधिक से अधिक कार्य करने हेतु अनुरोध किया तथा धन्यवाद ज्ञापित किया।

"एकल उपयोग प्लास्टिक को अस्वीकार करें और ऐसे प्लास्टिक को इन्कार करें जिसका आप फिर से उपयोग नहीं कर सकते हैं। इस प्रकार हम एक स्वच्छ और हरित विश्व के लिए मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं"। यह संदेश संयुक्त राष्ट्र महासचिव, संयुक्त राष्ट्र श्री एंटोनियो गुटेरेस की ओर से विश्व पर्यावरण दिवस-2018 पर दिया गया है। प्लास्टिक का व्यापक उपयोग एक विश्वव्यापी पर्यावरणीय मुद्दा है और प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने में व्यक्तिगत प्रतिबद्धताओं और इसके लिए विशिष्ट प्रयास करने की आवश्यकता है। इस साल भारत विश्व पर्यावरण दिवस-2018 समारोहों की मेजबानी कर रहा है। अत्यधिक प्लास्टिक उपयोग के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता पैदा करने की राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के साथ समन्वय बनाते हुए सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान में 05 जून, 2018 को विश्व पर्यावरण दिवस-2018 मनाया गया। इस अवसर पर संस्थान के द्वितीय निदेशक के सम्मान में डॉ सीआर कृष्णमूर्ति मेमोरियल ऑरेशन का आयोजन किया गया। इस वर्ष 22वां व्याख्यान प्रोफेसर रिकी केज, ग्रैमी अवॉर्ड विजेता, संगीतकार और एडजंक्ट प्रोफेसर, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज, बेंगलुरू द्वारा दिया गया।  उन्होंने अपने व्याख्यान “म्यूजिक फार द प्लेनेट” में कहा कि संगीत सिर्फ एक संदेश संचार करने का माध्यम ही नहीं बल्कि एक श्रोता की चेतना में गहराई तक उस संदेश को बनाए रखने के लिए भी एक शक्तिशाली भाषा है। उनका मानना है कि संगीत और प्रकृति एक ही हैं और उन्होंने अपने जीवन को पर्यावरणीय चेतना जगाने और अपने संगीत के माध्यम से जलवायु परिवर्तन पर जागरूकता पैदा करने के लिए समर्पित कर दिया है। 

सभा का स्वागत करते हुए, सीएसआईआर- भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान के  निदेशक प्रोफेसर आलोक धावन ने कहा कि यह संस्थान के लिए एक गर्व का विषय है कि उसे एक ऐसे ग्रैमी अवॉर्ड विजेता कलाकार की मेजबानी करने का अनूठा अवसर मिला जो  संगीत और प्रकृति को मिलाकर दुनिया भर के कलाकारों को पर्यावरण संरक्षण की ओर काम करने के लिए एक साथ लाया है। प्रोफेसर पी के सेठ, नासी वरिष्ठ वैज्ञानिक, प्लैटिनम जुबली फेलो और पूर्व निदेशक सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान ने समारोह की अध्यक्षता की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और पर्यावरण की देखभाल एक दूसरे के अभिन्न अंग हैं। प्रकृति के पांच तत्वों को आमंत्रित करना हमारे दैनिक दिनचर्या का भाग  है और पूरे ब्रह्मांड के लिए शांति और सदभाव के लिए प्रार्थना किए बिना कोई भी अवसर पूरा नहीं होता है। इस अवसर पर पिछले सप्ताह स्कूली बच्चों के लिए आयोजित ‘प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करो” विषय पर पेंटिंग प्रतियोगिता के पुरस्कार विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। 

सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-आईआईटीआर), लखनऊ में 01 नवंबर, 2018  को 53वें वार्षिक दिवस समारोह का  आयोजन किया गया। 

समारोह के मुख्या अतिथि, श्री राम नाईक, माननीय राज्यपाल, उत्तर प्रदेश थे। डॉ. अनुराग अग्रवाल, निदेशक, सीएसआईआर-जीनोमिकी एवं समवेत जीव विज्ञान संस्थान, दिल्ली, एवं प्रोफेसर आर.के. खाण्डल, अध्यक्ष, आर एंड डी तथा बिजनेस डिवेलप्मेंट, इंडिया ग्लाइकोल्स लिमिटेड इस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि थे। 

मुख्यक अतिथि श्री राम नाईक, माननीय राज्यपाल, उत्तर प्रदेश ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में महत्वपूर्ण उपलब्धियों हेतु  सीएसआईआर-आईआईटीआर परिवार को बधाई दी और वैज्ञानिकों को लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु वर्धित गति के साथ-साथ  अच्छे कार्य हेतु प्रोत्साहित किया। उन्होंने वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित किया कि समाज की वर्तमान समस्याओं के समाधान खोजने हेतु कार्य  करें। विशेषकर देश के कृषि समुदाय जिन समस्याओं का सामना कर रहा है, उनके समाधान हेतु कार्य करें। 

प्रोफेसर आलोक धावन, निदेशक, सीएसआईआर–आईआईटीआर ने मुख्य् अतिथि श्री राम नाईक, माननीय राज्यपाल, उत्तर प्रदेश एवं विशिष्ट अतिथि, डॉ. अनुराग अग्रवाल तथा प्रोफेसर आर.के. खाण्डल सहित सभी का स्वागत किया एवं वर्ष 2017-18 हेतु संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत किया। उन्होंने बीते वर्ष में संस्थान की विभिन्न सफलताओं से सभी को अवगत कराते हुए कहा कि वार्षिक दिवस अतीत की सफलताओं को याद करने और भविष्य के लिए लक्ष्य निर्धारित करने का एक उचित अवसर होता है। माननीय प्रधानमंत्री जी के नवीन भारत के सृजन के सपनों को मूर्त रूप देने के लिए हमारा संस्थाओन पूर्णत: प्रतिबद्ध है। विगत चार वर्षों में माननीय प्रधानमंत्री, जो सीएसआईआर के अध्यणक्ष भी हैं, उनकी अध्य्क्षता में सीएसआईआर-आईआईटीआर  ने उत्त रोत्तेर प्रगति की है और आम आदमी के जीवन की गुणवत्ताे में सुधार हेतु अनेकों प्रौद्योगिकियां विकसित की हैं। सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-आईआईटीआर), विषविज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी, अपने  आदर्श वाक्य "पर्यावरण और स्वास्थ्य की सुरक्षा और उद्योग की सेवा" के साथ, भारत में एकमात्र और विषविज्ञान में गिने चुने संस्थानों में एक है।  इस संस्थान ने व्यावसायिक, औद्योगिक और पर्यावरण विषविज्ञान के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। मुझे 2017-18 की अवधि के दौरान संस्थान द्वारा किए गए कुछ महत्वपूर्ण कार्यों का विवरण प्रस्तुत करते हुए गर्व की अनुभूति हो रही है। सीएसआईआर-आईआईटीआर, विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे और विषविज्ञान में मानव संसाधन के साथ 'स्वच्छ भारत अभियान', 'स्वस्थ भारत अभियान', 'मेक इन इंडिया', 'स्टार्टअप इंडिया‘, ‘डिजिटल इंडिया', 'स्मार्ट गांव', 'स्मार्ट शहर', 'नमामि गंगे', और 'उन्नत भारत' अभियान’  जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों में  समुचित वैज्ञानिक और तकनीकी हस्तक्षेप के साथ-साथ सतत विकास का लक्ष्य भी प्रदान करता है। इस वर्ष के दौरान, सभी के लिए सुरक्षित और पौष्टिक भोजन प्रदान करने के लिए, सीएसआईआर-आईआईटीआर ने "बीज से पेट" तक या ‘’खेत खलिहान से भोजन की थाली’’ तक खाद्य और उपभोक्ता सुरक्षा समाधान (फोकस) पर एक सीएसआईआर मिशन-मोड कार्यक्रम  शुरू किया है। जिसमें सीएसआईआर की 7 प्रयोगशालाएं भाग ले रही हैं। उन्होंने राष्ट्रीय मिशन कार्यक्रमों के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराई एवं कहा कि डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के साथ समन्वय में संस्थान अपनी वार्षिक रिपोर्ट 2015 से ही डिजिटल प्रारूप में प्रस्तुत कर रहा है। 

इस अवसर पर सीएसआईआर-आईआईटीआर प्रकाशनों: सीएसआईआर-आईआईटीआर का “वार्षिक प्रतिवेदन” (हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में), समाचार पत्र में आईआईटीआर (संकलन), पोस्ट-मानसून परिवेश वायु सर्वेक्षण रिपोर्ट एवं सीएसआईआर-आईआईटीआर के शोध पत्रों का संकलन (2017-18), वर्ष 2019 के लिए संस्थान के कैलेंडर एवं संस्थाकपक निदेशक, प्रोफेसर सिब्तेय हसन ज़ैदी, के जीवन वृत्तर पर पुस्तआक आदि का विमोचन किया। इस अवसर पर  संस्थान के वैज्ञानिकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों को संस्थान में उनकी विशिष्ट सेवा हेतु माननीय राज्यपाल द्वारा सम्मानित भी किया गया।

प्रकाशन विमोचन  उपरांत डॉ. डी. कार चौधुरी, मुख्य वैज्ञानिक, सीएसआईआर-आईआईटीआर एवं डॉ. देवेन्द्र परमार, मुख्य वैज्ञानिक, सीएसआईआर-आईआईटीआर ने अतिथिगण का परिचय दिया। 

डॉ. के.सी. खुल्बे, वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक ने धन्यवाद ज्ञापित किया। समारोह का समापन संस्थान के शोध छात्रों, कर्मचारियों और उनके परिजनों द्वारा प्रस्तुत अपनी वैज्ञानिक उपलब्धियों के अतिरिक्त रचनात्मक और अभिनव क्षमताओं के प्रदर्शन से परिपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ सम्पन्न हुआ।

सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान, लखनऊ (सीएसआईआर-आईआईटीआर) में 53वें वार्षिक दिवस समारोह कार्यक्रम के अंतर्गत 22वें प्रोफेसर सिब्ते हसन ज़ैदी व्याख्यान  का आयोजन किया गया। यह व्याख्यान संस्थान के संस्थापक निदेशक, प्रोफेसर सिब्ते हसन ज़ैदी के सम्मान में प्रत्येक वर्ष आयोजित किया जाता है । इस वर्ष यह व्याख्यान डॉ. अनुराग अग्रवाल, निदेशक सीएसआईआर-जीनोमिकी और समवेत जीवविज्ञान संस्थान, दिल्ली द्वारा दिया गया। 

प्रोफेसर आलोक धावन, निदेशक, सीएसआईआर-आईआईटीआर ने सभा का स्वागत करते हुए कहा कि संस्थान इस अवसर पर अपने संस्थापक को याद करता है और संस्थान के आदर्श वाक्य “पर्यावरण एवं स्वास्थ्य की सुरक्षा तथा  उद्योग की सेवा” को पूर्ण  करने हेतु स्वयं को पुन: समर्पित करता है। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर सीएसआईआर परिवार के वरिष्ठ सदस्यों की उपस्थिति संस्थान एवं  इसके कर्मचारियों के लिए वास्तव मं  एक विशेष अवसर है।

डॉ. योगेश्वर शुक्ला, मुख्य वैज्ञानिक, सीएसआईआर-आईआईटीआर ने समारोह के अध्यक्ष डॉ. अनुराग अग्रवाल एवं  प्रोफेसर आर के खाण्डल का परिचय दिया। इसके पश्चात डॉ॰ अनुराग अग्रवाल द्वारा ““टार्गेटिंग माईटोकॉन्ड्रिया फॉर प्रिवेंटिंग लंग डिज़ीज: बींग प्रीसाईज़ली इमप्रिसाईस”” पर व्याख्यान दिया । व्याख्यान में उन्होंने कहा कि हाल के निष्कर्ष, चिकित्सकीय रूप से विभिन्न फेफड़ों की बीमारियों के बीच आणविक समानता दर्शाते हैं। पूर्व-नैदानिक मॉडल में श्वसन रोगों को रोकने या इलाज के लिए यह संबद्धता (लिंकिंग) माईटोकॉन्ड्रियल लक्षित थेरेपी के 3आर मॉडल- मरम्मत, पुन: प्रोग्रामिंग और प्रतिस्थापन (रिपयरिंग, रीप्रोग्रामिंग एंड रेपलेसमेंट) को विकसित करने का अवसर है ।

प्रोफेसर आर.के. खांडल, अध्यक्ष, आर एंड डी और बिजनेस डेवलप्मेंट, इंडिया ग्लाइकोल्स लिमिटेड ने अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में अनुसंधान और विकास में ट्रांसलैशनल  तथा  समस्या निवारण दृष्टिकोण की संबद्धता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि संस्थानों को आत्मनिर्भरता का लक्ष्य रखना चाहिए तथा निधि (फंड) तलाशने वालों की बजाय निधि निर्माण की दिशा में कार्य करना चाहिए।

डॉ. ए.बी. पंत, प्रधान वैज्ञानिक, सीएसआईआर-आईआईटीआर ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-आईआईटीआर), लखनऊ में  दिनांक 26 सितम्बर, 2018  को सीएसआईआर स्थापना दिवस समारोह का आयोजन किया गया। डॉ. पूनम कक्कड़, मुख्य वैज्ञानिक, सीएसआईआर-आईआईटीआर ने मुख्य अतिथिगण को सीएसआईआर द्वारा विकसित तकनीक से संरक्षित पुष्प प्रदान कर स्वागत किया एवं अतिथिगण  का परिचय दिया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. सतीश आर. वाटे, पूर्व निदेशक, सीएसआईआर-एनईईआरआई (नीरी), नागपुर एवं अध्यक्ष, भर्ती एवं आकलन बोर्ड, सीएसआईआर, नई दिल्ली ने “जल संसाधन प्रबंधन में चुनौतियां" विषय पर सीएसआईआर स्थापना दिवस व्याख्यान दिया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि महोदय ने जल संसाधन प्रबंधन में चुनौतियां’ पर व्याख्यान देते हुए कहा कि देश के उत्तर और दक्षिण दोनों क्षेत्रों में प्रकृति के क्रोध को उजागर करने वाली हालिया घटनाओं और इसके कारण होने वाले विनाश के कारण प्रकृति के साथ सद्भाव सुनिश्चित करने का महत्व एक बार फिर चर्चा का केंद्र बिंदु बन गया है। हाल में आयी  बाढ़  ने प्रभावी जल संसाधन प्रबंधन की आवश्यकता पर पुनः बल दिया है। टिकाऊ जल संसाधन प्रबंधन पर कई दशकों से विचार -  विमर्श  हुआ है लेकिन मूल प्रश्न अभी भी बना  हुआ  है,  भले ही यह जल की कमी हो या उपलब्ध जल संसाधनों का अनुचित उपयोग। उन्होंने आगे कहा कि तकनीकी हस्तक्षेपों के माध्यम से जल की गुणवत्ता और मात्रा में सुधार करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं और पुनर्चक्रण ( रीसाइकल ), पुन: उपयोग और प्रभावी वितरण पर केंद्रित एक व्यावहारिक प्रबंधन योजना लागू की जानी चाहिए।

डॉ. वीपी काम्बोज, अध्यक्ष, निदेशक मंडल, बायोटेक कंसोर्टियम इंडिया लिमिटेड, नई दिल्ली तथा पूर्व निदेशक, सीएसआईआर-केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (सीडीआरआई), लखनऊ  ने समारोह की अध्यक्षता किया। उन्होंने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि भारत ने विविध क्षेत्रों में जबरदस्त प्रगति की है, लेकिन हम समाज के सभी स्तरों पर पेयजल की सार्वभौमिक उपलब्धता की मूलभूत आवश्यकता की ओर आवश्यक ध्यान नहीं दे पाए है। उन्होंने सुझाव दिया कि सीएसआईआर-आईआईटीआर जल निकायों (वॉटर बाडीज़) का देशव्यापी सर्वेक्षण करेगा  और प्राप्त जानकारी का प्रभावी जल संसाधन प्रबंधन हेतु रणनीति बनाने के लिए उपयोग किया जाएगा।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. सतीश आर वाटे ने सीएसआईआर-आईआईटीआर में आयोजित एक प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया। प्रदर्शनी में जल विश्लेषण किट, जलशोधन हेतु ओनीर, सीडी स्ट्रिप, आर्जिमोन जाँच किट सहित सीएसआईआर-आईआईटीआर द्वारा विकसित अनेक प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया गया। संस्थान लखनऊ के छात्रों और नागरिकों के लिए खुला था,  ताकि वे आधुनिकतम अनुसंधान एवं विकास के बारे में जानकारी प्राप्त कर  लाभ उठा सकें। प्रदर्शनी में अनेक वैज्ञानिक उपकरणों का भी प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शनी को  देखने हेतु  विभिन्न स्कूल एवं कालेज  के लगभग 150  छात्र आए। 

इस अवसर पर 25 वर्ष सेवा पूर्ण करने वाले स्टाफ़ को सीएसआईआर लोगो युक्त घड़ी और 31 अगस्त, 2018 तक सेवा निवृत होने वाले स्टाफ़ को शाल और प्रमाण पत्र प्रदान कर संस्थान द्वारा  सम्मानित किया गया। इस अवसर पर संस्थान के उपस्थित सेवा निवृत  स्टाफ के प्रति संस्थान की ओर से आभार भी व्यक्त किया गया। स्टाफ  के बच्चों हेतु आयोजित निबंध लेखन प्रतियोगिता के लिए पुरस्कार भी दिए गए।

डॉ. डी. कार चौधुरी, मुख्य वैज्ञानिक, सीएसआईआर-आईआईटीआर एवं संयोजक  ने धन्यवाद ज्ञपित किया।

अत्यधिक प्लास्टिक उपयोग के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता पैदा करने की राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के साथ समन्वय बनाते हुए सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान में 05 जून, 2018 को विश्व पर्यावरण दिवस - 2018 मनाया गया। इस अवसर पर संस्थान के द्वितीय निदेशक के सम्मान में डॉ सीआर कृष्णमूर्ति मेमोरियल ऑरेशन का आयोजन किया गया। इस वर्ष 22वां व्याख्यान प्रोफेसर रिकी केज, ग्रैमी अवॉर्ड विजेता, संगीतकार और एडजंक्ट प्रोफेसर, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज, बेंगलुरू द्वारा दिया गया।  उन्होंने अपने व्याख्यान “म्यूजिक फार द प्लेनेट” में कहा कि संगीत सिर्फ एक संदेश संचार करने का माध्यम ही नहीं बल्कि एक श्रोता की चेतना में गहराई तक उस संदेश को बनाए रखने के लिए भी एक शक्तिशाली भाषा है। उनका मानना है कि संगीत और प्रकृति एक ही हैं और उन्होंने अपने जीवन को पर्यावरणीय चेतना जगाने और अपने संगीत के माध्यम से जलवायु परिवर्तन पर जागरूकता पैदा करने के लिए समर्पित कर दिया है। 

सी.एस.आई.आर.-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थासन (सीएसआईआर-आईआईटीआर), लखनऊ में दिनांक 11  मई, 2018 को  राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस का आयोजन  किया गया। हमारे दैनिक जीवन में विज्ञान के महत्व को दोहराए जाने और छात्रों को विज्ञान के प्रति प्रोत्साहित करने हेतु  राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस प्रत्येक वर्ष  11 मई को देश में  मनाया जाता है। यह पोखरण परमाणु परीक्षण तिथि 11 मई, 1998  की यादगार के रूप में  इस दिन मनाया जाता है। इस दिन स्कूल एवं कालेज के विद्यार्थियों के भ्रमण  हेतु संस्थान में खुला दिवस (ओपेन डे) रहा।

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर प्रोफ़ेसर विनायक नाथ, सह संस्थापक, वेंचर केटालिस्ट, उत्तर प्रदेश ने  संस्थान के  प्रोफ़ेसर एसएच ज़ैदी सभागार में प्रौद्योगिकी दिवस व्याख्यान दिया। श्री नाथ ने सतत विकास सुनिश्चित करने के लिए सफल स्टार्ट-अप में प्रासंगिक प्रौद्योगिकियों की भूमिका पर प्रकाश डालने वाली  स्पष्ट प्रस्तुति दी। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक प्रोफेसर आलोक धावन ने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि यह व्याख्यान बहुत ही प्रेरक है, आशा है कि संस्थान के युवा वैज्ञानिक एवं छात्र इससे  प्रेरणा लेंगे।

संस्थान के जिज्ञासा कार्यक्रम के एक भाग के रूप में (युवा पीढ़ी को अनुसंधान एवं विकास की ओर आकर्षित करने हेतु) , सूर्या  पब्लिक स्कूल, सुल्तानपुर और केन्द्रीय विद्यालय अलीगंज तथा  सीआरपीएफ स्कूल की  शाखाओं के 300 से अधिक छात्रों ने संस्थान के इनोवेशन एंड ट्रांसलेशन रिसर्च (सीआईटीएआर) केंद्र का दौरा किया। विद्यार्थियों ने  संस्थान के इनोवेशन सेंटर में होने वाले आधुनिकतम अनुसंधान का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त किया  एवं सेंटर में कार्यरत वैज्ञानिकों से  बातचीत भी किया। 

इस अवसर पर श्री जितेंद्र शर्मा एमडी एवं सीईओ, आंध्र प्रदेश मेडटेक जोन लिमिटेड ने सीएसआईआर-आईआईटीआर द्वारा विकसित जल शोधन प्रौद्योगिकी ओ-नीर में अपनी गहरी रूचि व्यक्त की और संस्थान के साथ एक तकनीकी हस्तांतरण हेतु एमओयू हेतु  रुचि दिखाई।

भारत में नोबेल पुरस्कार विजेता और भारतीय भौतिक विज्ञानी सर चंद्रशेखर वेंकट रमन द्वारा रमन प्रभाव की खोज के अवसर पर हर साल 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का विषय है "एक सतत भविष्य के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी"।

इस वर्ष सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-आईआईटीआर) में आयोजित समारोह में डॉ॰ वी॰ पी॰ कांबोज़, चेयरमैन, बायोटेक कंसोर्टियम इंडिया लिमिटेड और पूर्व निदेशक सीएसआईआर- केन्द्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान मुख्य अतिथि थे। सीएसआईआर-आईआईटीआर के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. देवेंद्र परमार ने आगंतुकों का स्वागत किया। डॉ. डी कार चौधुरी, मुख्य वैज्ञानिक सीएसआईआर-आईआईटीआर और अध्यक्ष आयोजन समिति ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाए जाने की जेनेसिस पर प्रकाश डाला और मुख्य अतिथि का परिचय दिया। मुख्य अतिथि ने इस अवसर पर एक लोकप्रिय विज्ञान व्याख्यान दिया। सर सी वी रमन द्वारा किए गए कार्यों के बारे में चर्चा करते हुए उन्होंने छात्रों को बताया  किया  कि कैसे विज्ञान के क्षेत्र में की गई खोजों से सामाजिक लाभ के लिए तकनीकी उन्नति हुई। उन्होंने कई उदाहरणों का हवाला दिया जहां नई तकनीक ने कई विकारों / बीमारियों के समाधान सुझाए हैं।

इस अवसर पर संस्थान द्वारा एक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई जहां संस्थान द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया गया। शहर के विभिन्न संस्थानों के अंडर ग्रेजुएट छात्रों को प्रदर्शिनी को देखने और संस्थान के प्रयोगशालाओं में आकर वैज्ञानिकों के साथ विचार विमर्श करने के लिए आमंत्रित किया गया। छात्रों को संबोधित करते हुए, प्रोफेसर आलोक धावन ने तकनीकी महारत हासिल करने के लिए बुनियादी अनुसंधान की प्रासंगिकता पर बल दिया।

सीएसआईआर-आईआईटीआर के निदेशक प्रोफेसर आलोक धावन ने कहा कि विज्ञान में आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रश्न पूछे जाने चाहिए और रचनात्मकता को बढ़ावा देना चाहिए जिससे हमारे देश में सर सी वी रमन जैसे और भी बन सकें। उन्होंने विद्यार्थियों का  वैज्ञानिक जिज्ञासा और नवीनता बढ़ाने के लिए संस्थान द्वारा शुरू किए गए दो कार्यक्रमों का हिस्सा बनने के लिए आवाहन किया। इस अवसर पर संस्थान द्वारा एक प्रदर्शनी आयोजित की गई जिसमे संस्थान द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया गया। शहर के संस्थानों के 200 से अधिक अंडर ग्रेजुएट छात्रों को संस्थान के प्रयोगशालाओं में जाने और वैज्ञानिक कर्मचारियों के साथ बातचीत करने के लिए आमंत्रित किया गया। 

डॉ. के. रवीराम, समिति के संयोजक ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया। 

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