हमारे कार्यक्रम

"एकल उपयोग प्लास्टिक को अस्वीकार करें और ऐसे प्लास्टिक को इन्कार करें जिसका आप फिर से उपयोग नहीं कर सकते हैं। इस प्रकार हम एक स्वच्छ और हरित विश्व के लिए मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं"। यह संदेश संयुक्त राष्ट्र महासचिव, संयुक्त राष्ट्र श्री एंटोनियो गुटेरेस की ओर से विश्व पर्यावरण दिवस-2018 पर दिया गया है। प्लास्टिक का व्यापक उपयोग एक विश्वव्यापी पर्यावरणीय मुद्दा है और प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने में व्यक्तिगत प्रतिबद्धताओं और इसके लिए विशिष्ट प्रयास करने की आवश्यकता है। इस साल भारत विश्व पर्यावरण दिवस-2018 समारोहों की मेजबानी कर रहा है। अत्यधिक प्लास्टिक उपयोग के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता पैदा करने की राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के साथ समन्वय बनाते हुए सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान में 05 जून, 2018 को विश्व पर्यावरण दिवस-2018 मनाया गया। इस अवसर पर संस्थान के द्वितीय निदेशक के सम्मान में डॉ सीआर कृष्णमूर्ति मेमोरियल ऑरेशन का आयोजन किया गया। इस वर्ष 22वां व्याख्यान प्रोफेसर रिकी केज, ग्रैमी अवॉर्ड विजेता, संगीतकार और एडजंक्ट प्रोफेसर, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज, बेंगलुरू द्वारा दिया गया।  उन्होंने अपने व्याख्यान “म्यूजिक फार द प्लेनेट” में कहा कि संगीत सिर्फ एक संदेश संचार करने का माध्यम ही नहीं बल्कि एक श्रोता की चेतना में गहराई तक उस संदेश को बनाए रखने के लिए भी एक शक्तिशाली भाषा है। उनका मानना है कि संगीत और प्रकृति एक ही हैं और उन्होंने अपने जीवन को पर्यावरणीय चेतना जगाने और अपने संगीत के माध्यम से जलवायु परिवर्तन पर जागरूकता पैदा करने के लिए समर्पित कर दिया है। 

सभा का स्वागत करते हुए, सीएसआईआर- भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान के  निदेशक प्रोफेसर आलोक धावन ने कहा कि यह संस्थान के लिए एक गर्व का विषय है कि उसे एक ऐसे ग्रैमी अवॉर्ड विजेता कलाकार की मेजबानी करने का अनूठा अवसर मिला जो  संगीत और प्रकृति को मिलाकर दुनिया भर के कलाकारों को पर्यावरण संरक्षण की ओर काम करने के लिए एक साथ लाया है। प्रोफेसर पी के सेठ, नासी वरिष्ठ वैज्ञानिक, प्लैटिनम जुबली फेलो और पूर्व निदेशक सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान ने समारोह की अध्यक्षता की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और पर्यावरण की देखभाल एक दूसरे के अभिन्न अंग हैं। प्रकृति के पांच तत्वों को आमंत्रित करना हमारे दैनिक दिनचर्या का भाग  है और पूरे ब्रह्मांड के लिए शांति और सदभाव के लिए प्रार्थना किए बिना कोई भी अवसर पूरा नहीं होता है। इस अवसर पर पिछले सप्ताह स्कूली बच्चों के लिए आयोजित ‘प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करो” विषय पर पेंटिंग प्रतियोगिता के पुरस्कार विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। 

देश के प्रमुख विषविज्ञान संस्थान, सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान में नवंबर 4,  2017 को 52वां वार्षिक दिवस मनाया गया। इस समारोह के मुख्य अतिथि प्रोफेसर अरुण तिवारी, पूर्व मिसाइल वैज्ञानिक और लेखक थे, जिसकी अध्यक्षता पद्मश्री डॉ॰ नित्या आनंद, पूर्व निदेशक, सीएसआईआर-सीडीआरआई ने की। संस्थान के निदेशक प्रोफेसर आलोक धावन ने अतिथियों का स्वागत किया और वर्ष 2016-2017 के लिए संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने इस काल में संस्थान के कई उल्लेखनीय योगदानों का वर्णन किया और कहा कि संस्थान का वार्षिक दिवस एक उपयुक्त अवसर होता है जब सभी कर्मचारी संस्थान के मिशन को प्राप्त करने के लिए पूर्व में निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध होते हैं और भविष्य के लिए नए आयाम निर्धारित करते है। उन्होंने स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत, कौशल भारत, नमामी गंगे आदि जैसे राष्ट्रीय मिशन कार्यक्रमों के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता को दोहराया और कहा कि संस्थान डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के साथ समन्वय में डिजिटल प्रारूप में अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी कर रहा है।

सीएसआईआर-आईआईटीआर के मुख्य वैज्ञानिक और आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ॰ डी॰ कार चौधरी ने मुख्य अतिथियों का परिचय दिया। 

वार्षिक दिन व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए, प्रोफेसर अरुण तिवारी ने कहा कि देश के समस्त विकास में बाधा "है" और "नहीं है" के बीच चौड़ा अंतर है। उन्होंने सुझाव दिया कि व्यक्तियों द्वारा सामाजिक दायित्व में वृद्धि इस खाई को पाटने का सबसे अच्छा तरीका है।

पद्मश्री डॉ॰ नित्या आनंद ने अध्यक्षीय भाषण दिया और सीएसआईआर-आईआईटीआर परिवार को अपनी उपलब्धियों पर बधाई दी, साथ ही साथ आग्रह किया कि वह पिछली उपलब्धियों पर ही संतोष न  करें। उन्होंने वैज्ञानिकों को राष्ट्र के संस्थापकों के सपनों को पूरा करने के लिए काम करने का आग्रह किया।

इस अवसर पर, सीआईएसआईआर-आईआईटीआर की वार्षिक रिपोर्ट (हिंदी और अंग्रेजी), प्रिंट मीडिया में सीएसआईआर-आईआईटीआर का एक संकलन, CITAR सुविधा (सेंटर फार इनोवेशन एंड  ट्रांसलेशनल रिसर्च) पर एक ब्रोशर, नैनोटॉक्सिकोलॉजी पर एक पुस्तक और वर्ष 2018 के लिए संस्थान का कैलेंडर भी जारी किया गया। सीएसआईआर-आईआईटीआर परिवार के कई सदस्यों को उनकी प्रतिष्ठित सेवा संस्थान के लिए सम्मानित किया गया। 

डॉ॰ देवेंद्र परमार, मुख्य वैज्ञानिक ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया। इस समारोह का समापन संस्थान के शोध छात्रों द्वारा एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ संपन्न हुआ

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सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्‍थान में हिंदी सप्‍ताह 2017 के उद्घाटन समारोह का आयोजन

सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान, लखनऊ में आज दिनांक 14 सितंबर, 2017 को प्रातः 10:30 बजे एस.एच. जैदी सभागार में हिंदी सप्ताह के उद्घाटन समारोह का आयोजन किया गया। श्री चंद्र मोहन तिवारी, हिंदी अधिकारी, सीएसआईआर-आईआईटीआर ने अतिथिगण का परिचय दिया। समारोह के मुख्य अतिथि श्री पीयूष वर्मा, क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी, लखनऊ एवं विशिष्ट अतिथि डॉ. अनिल रस्तोगी, वैज्ञानिक एवं फिल्म कलाकार थे। इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री पीयूष वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि केवल हिंदी दिवस को नहीं संपूर्ण वर्ष इसी चेतना एवं संकल्प से हिंदी में अधिक से अधिक कार्य करें। हमें अपनी भाषा पर गर्व करना चाहिए। सरल भाषा का प्रयोग करते हुए विज्ञान की छोटी–छोटी पुस्तके हिंदी भाषा में लिखना चाहिए। भाषा को रोज़गार से जोड़ना चाहिए। हम सभी को हिंदी भाषा के विकास के लिए संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने संस्थान की राजभाषा पत्रिका एवं हिंदी में किए जा रहे अन्य कार्यों की सराहना भी किया।

विशिष्ट अतिथि, डॉ. अनिल रस्तोगी ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदी भाषा केवल भारत में ही नहीं अपितु अनेक देशों में बोली जाती है। उन्होंने भारत सरकार की विभिन्न हिंदी प्रोत्साहन योजनाओं तथा हिंदी भाषा में कार्य करने हेतु उपलब्ध डिजिटल टूल्स पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए कहा कि हमें अपनी भाषा को बढ़ावा देने के लिए और गंभीर प्रयास करने चाहिए, हिंदी में सोचें, हिंदी में लिखें और हिंदी में ही बोलें। 

समारोह की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक, प्रोफेसर आलोक धावन ने किया। उन्होंने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि विज्ञान को आगे ले जाने हेतु भाषा एक सशक्त माध्यम है। किसी देश की उन्नति उसकी भाषा और संस्कृति से होती है। हिंदी भाषा बहुत समृद्ध भाषा है, इसका शब्द भंडार बहुत विशाल है, वैज्ञानिक और तकनीकी कार्य इसमें आसानी से किए जा सकते हैं। हमारा संस्थान इसमें अग्रसर है, अनेक शोध पत्र, वैज्ञानिक लेख हिंदी में लिखे जा रहे हैं। वर्ष 2016 में हिंदी में राष्ट्रीय वैज्ञानिक संगोष्ठी का सफलता पूर्वक आयोजन किया गया था और इस वर्ष 11–13 अक्टूबर, 2017 को अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक संगोष्ठी होने जा रही है । हिंदी सप्ताह के दौरान हमें विचार करना चाहिए कि कैसे हम अपनी राजभाषा हिंदी को और आगे ले जा सकते हैं और पूरे वर्ष कैसे अधिक से अधिक इसका प्रयोग कर सकते हैं। हम अपनी राजभाषा को कैसे आगे ले जाएं, यह सोच हम सभी के अंदर होनी चाहिए। 

संस्थान के प्रशासन नियंत्रक, श्री अनिल कुमार ने बताया कि हिंदी सप्ताएह के दौरान अनेक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। इसमें वैज्ञानिक, तकनीकी एवं प्रशासनिक अधिकारी/कर्मचारी/शोध-छात्र बढ़-चढ़कर भाग लेते है। समारोह के अंत में उन्होंने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। समारोह का संचालन श्री चंद्र मोहन तिवारी, हिंदी अधिकारी, सीएसआईआर-आईआईटीआर ने किया।


हिंदी सप्ताह 2017 के पुरस्‍कार वितरण एवं समापन समारोह का आयोजन

सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान, लखनऊ में दिनांक 20 सितंबर, 2017 को एस.एच. जैदी सभागार में हिंदी सप्ताह के पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। समारोह के संयोजक, श्री चंद्र मोहन तिवारी, हिंदी अधिकारी, सीएसआईआर-आईआईटीआर ने मुख्य अतिथि, पद्मश्री प्रोफ़ेसर प्रमोद टंडन, सी.ई.ओ. बायोटेक पार्क, लखनऊ का स्वागत किया। समारोह की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक, प्रोफ़ेसर आलोक धावन ने किया। मुख्य अतिथि महोदय ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदी से जुड़े कार्यक्रम में आकर हमें अपार प्रसन्नता होती है। हिंदी में वैज्ञानिक कार्य करने वाले संस्थान कम हैं, किंतु सीएसआईआर-आईआईटीआर में वैज्ञानिक एवं तकनीकी कार्य हिंदी में काफी किए जा रहे हैं, यह प्रसन्नता की बात है। शोध पत्र हिंदी में लिखे जा रहे हैं, यह बहुत अच्छी बात है, परंतु मैं वैज्ञानिकों और शोध छात्रों से आग्रह करता हूँ कि इस क्षेत्र में और परिश्रम करके अधिक से अधिक शोध पत्र हिंदी में प्रकाशित करें, जिससे कि आम जनता वैज्ञानिक उपलब्धियों का लाभ उठा सके। अनेक पुरस्कार प्राप्त संस्थान की राजभाषा पत्रिका ‘’विषविज्ञान संदेश’’ एक उल्लेखनीय प्रयास है, जो कि अति प्रसंशनीय है और यह हमारे लिए प्रेरणास्रोत है। इस संस्थान में जिस प्रकार हिंदी में कार्य किया जा रहा है, वह अपने आप में एक अनुकरणीय उदाहरण है। संबोधन के बाद मुख्य अतिथि ने 27 प्रतियोगिताओं के विजयी प्रतिभागियों को और निदेशक महोदय ने पिछले एक वर्ष में हिंदी में कार्य करने हेतु प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 11 नियमित स्टाफ को प्रमाणपत्र और पुरस्कार प्रदान किए। पुरस्कार के साथ-साथ हिंदी साहित्य की पुस्तकें भी प्रदान की गईं हैं। 

संस्थान के निदेशक, प्रोफेसर आलोक धावन ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि विज्ञान को आगे ले जाने हेतु भाषा एक सशक्त माध्यम है। अंग्रेजी भाषा में शब्द सीमित हैं, वहीं हिंदी के पास विस्तृत शब्द भण्डार है, वैज्ञानिक और तकनीकी कार्य इसमें आसानी से किए जा सकते हैं। हम अपनी राजभाषा को कैसे आगे ले जाएं, यह सोच हम सभी के अंदर होनी चाहिए। संस्थान से छमाही राजभाषा पत्रिका ”विषविज्ञान संदेश" प्रकाशित की जा रही है और पर्यावरण और स्वास्थ्य से संबंधित पुस्तकें शीघ्र प्रकाशित की जाएंगी, जिससे आम जनता इनका लाभ उठा सके। हम वैज्ञानिक उपलब्धियों को आम जनता तक पहुंचाने के लिए अग्रसर हैं। 

समारोह के अंत में संस्थान के प्रशासन नियंत्रक, श्री अनिल कुमार ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया।

अत्यधिक प्लास्टिक उपयोग के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता पैदा करने की राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के साथ समन्वय बनाते हुए सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान में 05 जून, 2018 को विश्व पर्यावरण दिवस - 2018 मनाया गया। इस अवसर पर संस्थान के द्वितीय निदेशक के सम्मान में डॉ सीआर कृष्णमूर्ति मेमोरियल ऑरेशन का आयोजन किया गया। इस वर्ष 22वां व्याख्यान प्रोफेसर रिकी केज, ग्रैमी अवॉर्ड विजेता, संगीतकार और एडजंक्ट प्रोफेसर, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज, बेंगलुरू द्वारा दिया गया।  उन्होंने अपने व्याख्यान “म्यूजिक फार द प्लेनेट” में कहा कि संगीत सिर्फ एक संदेश संचार करने का माध्यम ही नहीं बल्कि एक श्रोता की चेतना में गहराई तक उस संदेश को बनाए रखने के लिए भी एक शक्तिशाली भाषा है। उनका मानना है कि संगीत और प्रकृति एक ही हैं और उन्होंने अपने जीवन को पर्यावरणीय चेतना जगाने और अपने संगीत के माध्यम से जलवायु परिवर्तन पर जागरूकता पैदा करने के लिए समर्पित कर दिया है। 

सी.एस.आई.आर.-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थासन (सीएसआईआर-आईआईटीआर), लखनऊ में दिनांक 11  मई, 2018 को  राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस का आयोजन  किया गया। हमारे दैनिक जीवन में विज्ञान के महत्व को दोहराए जाने और छात्रों को विज्ञान के प्रति प्रोत्साहित करने हेतु  राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस प्रत्येक वर्ष  11 मई को देश में  मनाया जाता है। यह पोखरण परमाणु परीक्षण तिथि 11 मई, 1 99 8  की यादगार के रूप में  इस दिन मनाया जाता है। इस दिन स्कूल एवं कालेज के विद्यार्थियों के भ्रमण  हेतु संस्थान में खुला दिवस (ओपेन डे) रहा।

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर प्रोफ़ेसर विनायक नाथ, सह संस्थापक, वेंचर केटालिस्ट, उत्तर प्रदेश ने  संस्थान के  प्रोफ़ेसर एसएच ज़ैदी सभागार में प्रौद्योगिकी दिवस व्याख्यान दिया। श्री नाथ ने सतत विकास सुनिश्चित करने के लिए सफल स्टार्ट-अप में प्रासंगिक प्रौद्योगिकियों की भूमिका पर प्रकाश डालने वाली  स्पष्ट प्रस्तुति दी। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक प्रोफेसर आलोक धावन ने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि यह व्याख्यान बहुत ही प्रेरक है, आशा है कि संस्थान के युवा वैज्ञानिक एवं छात्र इससे  प्रेरणा लेंगे।

संस्थान के जिज्ञासा कार्यक्रम के एक भाग के रूप में (युवा पीढ़ी को अनुसंधान एवं विकास की ओर आकर्षित करने हेतु) , सूर्या  पब्लिक स्कूल, सुल्तानपुर और केन्द्रीय विद्यालय अलीगंज तथा  सीआरपीएफ स्कूल की  शाखाओं के 300 से अधिक छात्रों ने संस्थान के इनोवेशन एंड ट्रांसलेशन रिसर्च (सीआईटीएआर) केंद्र का दौरा किया। विद्यार्थियों ने  संस्थान के इनोवेशन सेंटर में होने वाले आधुनिकतम अनुसंधान का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त किया  एवं सेंटर में कार्यरत वैज्ञानिकों से  बातचीत भी किया। 

इस अवसर पर श्री जितेंद्र शर्मा एमडी एवं सीईओ, आंध्र प्रदेश मेडटेक जोन लिमिटेड ने सीएसआईआर-आईआईटीआर द्वारा विकसित जल शोधन प्रौद्योगिकी ओ-नीर में अपनी गहरी रूचि व्यक्त की और संस्थान के साथ एक तकनीकी हस्तांतरण हेतु एमओयू हेतु  रुचि दिखाई।

भारत में नोबेल पुरस्कार विजेता और भारतीय भौतिक विज्ञानी सर चंद्रशेखर वेंकट रमन द्वारा रमन प्रभाव की खोज के अवसर पर हर साल 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का विषय है "एक सतत भविष्य के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी"।

इस वर्ष सीएसआईआर-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-आईआईटीआर) में आयोजित समारोह में डॉ॰ वी॰ पी॰ कांबोज़, चेयरमैन, बायोटेक कंसोर्टियम इंडिया लिमिटेड और पूर्व निदेशक सीएसआईआर- केन्द्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान मुख्य अतिथि थे। सीएसआईआर-आईआईटीआर के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. देवेंद्र परमार ने आगंतुकों का स्वागत किया। डॉ. डी कार चौधुरी, मुख्य वैज्ञानिक सीएसआईआर-आईआईटीआर और अध्यक्ष आयोजन समिति ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाए जाने की जेनेसिस पर प्रकाश डाला और मुख्य अतिथि का परिचय दिया। मुख्य अतिथि ने इस अवसर पर एक लोकप्रिय विज्ञान व्याख्यान दिया। सर सी वी रमन द्वारा किए गए कार्यों के बारे में चर्चा करते हुए उन्होंने छात्रों को बताया  किया  कि कैसे विज्ञान के क्षेत्र में की गई खोजों से सामाजिक लाभ के लिए तकनीकी उन्नति हुई। उन्होंने कई उदाहरणों का हवाला दिया जहां नई तकनीक ने कई विकारों / बीमारियों के समाधान सुझाए हैं।

इस अवसर पर संस्थान द्वारा एक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई जहां संस्थान द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया गया। शहर के विभिन्न संस्थानों के अंडर ग्रेजुएट छात्रों को प्रदर्शिनी को देखने और संस्थान के प्रयोगशालाओं में आकर वैज्ञानिकों के साथ विचार विमर्श करने के लिए आमंत्रित किया गया। छात्रों को संबोधित करते हुए, प्रोफेसर आलोक धावन ने तकनीकी महारत हासिल करने के लिए बुनियादी अनुसंधान की प्रासंगिकता पर बल दिया।

सीएसआईआर-आईआईटीआर के निदेशक प्रोफेसर आलोक धावन ने कहा कि विज्ञान में आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रश्न पूछे जाने चाहिए और रचनात्मकता को बढ़ावा देना चाहिए जिससे हमारे देश में सर सी वी रमन जैसे और भी बन सकें। उन्होंने विद्यार्थियों का  वैज्ञानिक जिज्ञासा और नवीनता बढ़ाने के लिए संस्थान द्वारा शुरू किए गए दो कार्यक्रमों का हिस्सा बनने के लिए आवाहन किया। इस अवसर पर संस्थान द्वारा एक प्रदर्शनी आयोजित की गई जिसमे संस्थान द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया गया। शहर के संस्थानों के 200 से अधिक अंडर ग्रेजुएट छात्रों को संस्थान के प्रयोगशालाओं में जाने और वैज्ञानिक कर्मचारियों के साथ बातचीत करने के लिए आमंत्रित किया गया। 

डॉ. के. रवीराम, समिति के संयोजक ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया। 

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