संस्थान में राजभाषा कार्यान्वयन

सीएसआईआर- भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान में राजभाषा कार्यान्वयन की दिशा में अनवरत प्रयास जारी हैं। शनै: शनै: प्रगति की ओर अग्रसर संस्थान ने राजभाषा कार्यान्वयन के क्षेत्र में अनेक सफलताएँ प्राप्त की हैं। संस्थान की वैज्ञानिक उपलब्धियों का प्रचार-प्रसार व्यापक स्तर पर हिंदी भाषा के माध्यम से किया जा रहा है। संस्थान के वैज्ञानिक कार्यों में हिंदी भाषा का प्रयोग उत्तरोत्तर बढ़ा है और वैज्ञानिक उपलब्धियों/जानकारी का लाभ भी आमजन तक पहुँच रहा है तथा इसके साथ-साथ हिंदी भाषा का व्यापक प्रचार-प्रसार भी हो रहा है। कार्यालयी कार्यों एवं पत्राचार में हिंदी का उपयोग बढ़ाने हेतु भी संस्थान ने उल्लेखनीय प्रयास किया है और इसे बेहतर करने हेतु समय–समय पर समीक्षा की जाती है। भारत सरकार, गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग के अंतर्गत नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (कार्यालय-3), लखनऊ की ओर से संस्थान को अनेक पुरस्कार भी प्राप्त हुए हैं। हिंदी के प्रयोग के प्रति संस्थान के स्टाफ़ की रुचि भी निरंतर बढ़ रही है। स्टाफ़ के ज्ञान वर्धन एवं जनजागरूकता के उद्देश्य से संस्थान द्वारा हिंदी में प्रकाशित छमाही राजभाषा पत्रिका 'विषविज्ञान संदेश' एवं पेयजल, पर्यावरण आदि पर विभिन्न विवरणिकाओं को प्रकाशित किया गया है जिसकी माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश, श्री योगी आदित्यनाथ जी एवं डॉ. शेखर चि. मांडे, महानिदेशक सीएसआईआर एवं सचिव, डीएसआईआर, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार ने अपने पत्रों के माध्यम से प्रशंसा की है। इसी संदर्भ में शिक्षा निदेशक (बेसिक), उत्तर प्रदेश लखनऊ ने प्रदूषण/विषाक्तता के संबंध में जागरूकता हेतु प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में वितरण के लिए संस्थान द्वारा प्रकाशित लघु पुस्तक "हरियाली एवं खुशहाली" की प्रतियों को उपलब्ध कराने हेतु एक पत्र भेजा है।

राजभाषा पत्रिका “विषविज्ञान संदेश”

वार्षिक प्रतिवेदन

विषविज्ञान अनुसंधान पत्रिका

हिंदी सप्ताह - 2019

जनचेतना अभियान विवरणिकाएँ

नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (कार्यालय-3), लखनऊ की छमाही बैठक

संस्थान में आयोजित संगोष्ठियाँ

राजभाषा कार्यान्वयन समिति की तिमाही बैठक

संस्थान में विज्ञान के क्षेत्र में हिंदी का उपयोग

संस्थान में प्रशासन एवं संबद्ध विभागों में हिंदी का उपयोग

राजभाषा की पृष्ठभूमि


राजभाषा पत्रिका “विषविज्ञान संदेश”

संस्थान द्वारा जनसाधारण को वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने हेतु अधिक से अधिक सामग्री का हिंदी में प्रकाशन किया जा रहा है, जिनमें संस्थान की छमाही राजभाषा पत्रिका "विषविज्ञान संदेश" विशेष रूप से उल्लेखनीय है जिसका प्रकाशन वर्ष 1995 से निरंतर किया जा रहा है। पत्रिका को उच्च अधिकारियों/वैज्ञानिक संस्थानों/विश्वविद्यालयों आदि को निःशुल्क भेजा जाता है। इसमें मुख्यतः संस्थान के कार्यकलापों को प्रकाशित किया जाता है। इसमें 90% से अधिक शोधपत्र एवं वैज्ञानिक लेख होते हैं जो कि सरल, सहज एवं सुबोध हिंदी भाषा में होते हैं, जिससे जनसाधारण आसानी से इसका लाभ उठा सकते हैं। हिंदी पत्रिका "विषविज्ञान संदेश" के कई अंकों को प्रथम पुरस्कार सहित अनेक पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। यह पुरस्कार भारत सरकार, राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति ( कार्यालय–3), लखनऊ द्वारा प्रदान किए गए हैं।
विषविज्ञान संदेश के विभिन्न अंकों के लिए क्लिक करें



श्री राजनाथ सिंह जी, माननीय रक्षा मंत्री, भारत सरकार को राजभाषा पत्रिका
"विषविज्ञान संदेश" की प्रति भेंट करते हुए प्रोफेसर आलोक धावन,
निदेशक, सीएसआईआर–आईआईटीआर




श्री योगी आदित्यनाथ जी, माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश राजभाषा पत्रिका "विषविज्ञान
संदेश" का विमोचन करते हुए तथा साथ में प्रोफेसर आलोक धावन,
निदेशक, सीएसआईआर–आईआईटीआर




श्री राजनाथ सिंह, माननीय रक्षा मंत्री, भारत सरकार द्वारा राजभाषा
पत्रिका "विषविज्ञान संदेश" हेतु शुभकामनायें




श्री विजय रूपानी, माननीय मुख्यमंत्री, गुजरात को राजभाषा पत्रिका "विषविज्ञान संदेश" को
भेंट करते हुए सीएसआईआर-आईआईटीआर के निदेशक, प्रोफेसर आलोक धावन




वार्षिक प्रतिवेदन

वर्ष 2016-17 से संस्थान के वार्षिक प्रतिवेदन का हिंदी और अंग्रेज़ी भाषा में अलग-अलग प्रकाशन किया जा रहा है। इसमें पर्यावरण विषविज्ञान; खाद्य, औषधि एवं रसायन विषविज्ञान; नैनोमटीरिअल विषविज्ञान; नियामक विषविज्ञान एवं प्रणाली विषविज्ञान तथा स्वास्थ्य जोखिम मूल्यांकन के क्षेत्र में संबंधित वर्ष में संस्थान द्वारा किए गए कार्यों की ज्ञानप्रद जानकारी एवं संस्थान के अन्य वैज्ञानिक और तकनीकी कार्यकलापों तथा आयोजनों आदि का उल्लेख होता है।

वार्षिक प्रतिवेदन के विभिन्न अंकों के लिए क्लिक करें     हिन्दी में वार्षिक प्रतिवेदन           Annual report in English




श्री राजनाथ सिंह, माननीय रक्षा मंत्री, भारत सरकार को संस्थान का हिंदी "वार्षिक प्रतिवेदन"
भेंट करते हुए प्रोफेसर आलोक धावन, निदेशक सीएसआईआर-आईआईटीआर


विषविज्ञान अनुसंधान पत्रिका

संस्थान लगातार पांच दशकों से भी अधिक समय से विषविज्ञान के क्षेत्र में कार्यरत है एवं इसने मानव स्वास्थ्य के सुधार हेतु व्यवसायिक, औद्योगिक एवं पर्यावरण विषविज्ञान में अद्वितीय योगदान दिया है। विषविज्ञान अनुसंधान पत्रिका (टोक्सिकोलोजी रिसर्च बुलेटिन) में संस्थान के शोधपत्रों के सार (एब्स्ट्रैक्ट) एवं अनुसंधान संबंधी जानकारी का प्रकाशन किया जाता है। यह पत्रिका द्विभाषी है एवं संस्थान इस पत्रिका का ऑनलाइन प्रकाशन करता है।

विषविज्ञान अनुसंधान पत्रिका के विभिन्न अंकों के लिए क्लिक करें



हिंदी सप्ताह - 2019

सी.एस.आई.आर.-भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान, लखनऊ में 14-20 सितंबर, 2019 के दौरान हिंदी सप्ताह का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि डॉ दिनेश शर्मा, माननीय उप मुख्यमंत्री तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार, ने दिनांक 14 सितंबर, 2019 को हिंदी सप्ताह का उद्घाटन किया। श्री टी. एन. खुन्टिया, पुलिस उप महानिरीक्षक, ग्रुप केंद्र, केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल, बिजनौर, लखनऊ उद्घाटन समारोह के विशिष्ट अतिथि थे तथा संस्थान के निदेशक, प्रोफेसर आलोक धावन ने कार्यक्रम की अध्यक्षता किया। इस अवसर पर संस्थान के हिंदी प्रकाशनों की प्रदर्शनी भी आयोजित की गयी जिसका उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ दिनेश शर्मा जी ने किया। आगे .....

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जनचेतना अभियान विवरणिकाएँ

प्रदर्शनी, मेलों आदि में आमजन हेतु उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक जानकारी प्रदान करने हेतु अनेक हिंदी / द्विभाषी पोस्टर, लघु पुस्तकें एवं विवरणिकाएँ आदि (विशेषकर पर्यावरण संरक्षण, सुरक्षित पेयजल, प्लास्टिक उपयोग, पॉलीथिन बैग एवं सुरक्षित खाद्य सामग्री आदि के बारे में) संस्थान द्वारा निरंतर प्रकाशित की जा रहीं हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश एवं गुजरात की सरकार ने संस्थान द्वारा प्रकाशित विवरणिकाओं / लघु पुस्तकों की प्रशंसा की है।



आदर्श गांव



स्वच्छ जल



महिला स्वास्थ्य



प्लास्टिक निपटान



स्वच्छ पर्यावरण



हरियाली से खुशहाली



स्वस्थ भोजन



जन चेतना


माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश, श्री योगी आदित्यनाथ जी ने अपने पत्र के माध्यम से पर्यावरण प्रदूषण, जल प्रदूषण, प्लास्टिक विषाक्तता के संबंध में जनजागरूकता के उद्देश्य से संस्थान द्वारा हिंदी में प्रकाशित विवरणिकाओं की काफी प्रशंसा किया है। उन्होंने अपने पत्र में यह विश्वास व्यक्त किया कि स्वच्छ व संतुलित पर्यावरण सृजित करने में आमजन को सहयोगी व सहभागी बनाने के उद्देश्य से प्रकाशित की गई विवरणिकाओं से इस सम्बन्ध में जागरूकता बढ़ेगी और सभी लाभान्वित होंगे। विवरणिकाओं की सफलता हेतु उन्होंने हार्दिक शुभकामनाएं भी व्यक्त किया है।
सीएसआईआर के महानिदेशक, डॉ. शेखर चि. मांडे ने अपने पत्र के माध्यम से खुशी व्यक्त की है कि संस्थान से प्रकाशित छमाही राजभाषा पत्रिका 'विषविज्ञान संदेश' को नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, लखनऊ द्वारा लगातार प्रथम पुरस्कार से सम्माानित किया गया है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि पत्रिका को संस्थान की वेबसाइट पर डिजिटल रूप में उपलब्ध कराना इस बात का द्योतक है कि संस्थान राजभाषा हिंदी के संवैधानिक दायित्वों के प्रति सजग है और उनका बखूबी निर्वहन भी कर रहा है। डॉ. मांडे ने आशा व्यक्त की कि संस्थान अपने ऐसे प्रयास आगे भी जारी रखेगा तथा राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार में इसी तरह श्रीवृद्धि करता रहेगा। उन्होंने पत्रिका से जुड़े सभी व्यक्तियों को बधाई दी तथा इसके उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं।



संस्थान से हिंदी में प्रकाशित जनजागरूकता विवरणिकाओं के संदर्भ में माननीय
मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश का निदेशक, सीएसआईआर-आईआईटीआर को संबोधित पत्र




राजभाषा के प्रचार-प्रसार के संदर्भ में महानिदेशक, सीएसआईआर
का निदेशक, सीएसआईआर-आईआईटीआर को संबोधित पत्र



नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (कार्यालय-3), लखनऊ की छमाही बैठक

भारत सरकार, राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय के अंतर्गत नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (कार्यालय-3), लखनऊ की छमाही बैठक वर्ष में दो बार अप्रैल-सितंबर और अक्टूबर-मार्च की अवधि हेतु आयोजित होती है। इसमें केंद्रीय सरकार के नगर स्थित कार्यालय सदस्य होते हैं। इन बैठकों में छमाही के दौरान सदस्य कार्यालयों में राजभाषा कार्यान्वयन में प्रगति की समीक्षा की जाती है और भविष्य की रूपरेखा एवं लक्ष्य निर्धारित किए जाते हैं। संबंधित नगर स्थित केंद्रीय सरकार के कार्यालयों में से जो वरिष्ठतम अधिकारी होते हैं, वे नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति की अध्यक्षता करते हैं। संस्थान नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (कार्यालय-3), लखनऊ के अंतर्गत आता है, जिसके अध्यक्ष, निदेशक, भाकृअनुप-भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ हैं। केंद्रीय सरकार के 67 कार्यालय इसके सदस्य हैं। यह छमाही बैठक भाकृअनुप-भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ में आयोजित होती है। 67 सदस्य कार्यालयों में से राजभाषा कार्यान्वयन के मूल्यांकन के आधार पर कार्यालयी कार्यों एवं पत्रिका प्रकाशन के लिए पुरस्कार प्रदान किया जाता है।
भारत सरकार, गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग, नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (कार्यालय-3), लखनऊ की छमाही बैठक दिनांक 26.11.2019 में संस्थान को हिंदी में कार्यालयी कार्यों में उत्कृष्ट प्रदर्शन का द्वितीय पुरस्कार एवं छमाही राजभाषा पत्रिका "विषविज्ञान संदेश" के अंक 31 के प्रकाशन हेतु द्वितीय पुरस्कार के रूप में शील्ड और प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ है। संस्थान की ओर से निदेशक, प्रोफेसर आलोक धावन, प्रशासन नियंत्रक, श्री के.पी. शर्मा तथा हिंदी अधिकारी, श्री चन्द्र मोहन तिवारी ने पुरस्कार प्राप्त किया। यह बैठक भाकृअनुप-भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ में आयोजित हुई थी।



राजभाषा पत्रिका "विषविज्ञान संदेश" के अंक-31 हेतु प्राप्त
द्वितीय पुरस्कार की शील्ड एवं प्रमाणपत्र




कार्यालयी कार्यों में उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु प्राप्त द्वितीय पुरस्कार
की शील्ड एवं प्रमाणपत्र




संस्थान में आयोजित संगोष्ठियाँ

संस्थान वैज्ञानिक कार्यक्षेत्र में राजभाषा हिंदी के प्रगामी प्रयोग को उतरोत्तर बढ़ाने एवं सामान्य जन तक नवीनतम वैज्ञानिक एवं तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने हेतु समय-समय पर अनेक कार्य करता रहा है और इसी क्रम में संस्थान में निम्नलिखित वैज्ञानिक संगोष्ठियों का आयोजन भी किया गया:



राजभाषा कार्यान्वयन समिति की तिमाही बैठक

राजभाषा संबंधी संवैधानिक उपबंध, राष्ट्रपति के आदेश, राजभाषा अधिनियम 1963 (यथा संशोधित 1967), राजभाषा संकल्प, राजभाषा नियम 1976 (यथा संशोधित 1987) एवं भारत सरकार, गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग द्वारा जारी वार्षिक कार्यक्रम और मुख्यालय द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों, अनुदेशों, आदेशों के अनुसार राजभाषा का कार्य किया जाता है। प्रत्येक तिमाही में संस्थान की राजभाषा कार्यान्वयन की बैठक का नियमित आयोजन किया जाता है। संघ का राजकीय कार्य हिंदी में करने के लिए वार्षिक कार्यक्रम और बैठक में लिए गए निर्णयों का पूरी तरह से अनुपालन सुनिश्चित किया जाता है। अध्यक्ष एवं निदेशक, आईआईटीआर और समस्त सदस्य विगत तिमाही की बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुपालन और अनुवर्ती कार्रवाई की समीक्षा करते हैं। साथ ही आने वाले समय में हिंदी के उत्तरोत्तर प्रयोग की कार्ययोजना पर भी चर्चा करते हैं। बैठक में समिति के सदस्य सचिव विगत तिमाही के दौरान किए गए कार्यों के आंकड़े प्रस्तुत करते हैं, जिन्हें मुख्यालय, राजभाषा विभाग के क्षेत्रीय कार्यान्वयन कार्यालय और नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, नराकास (कार्यालय-3) को भी रिपोर्ट के माध्य‍म से साझा किया जाता है। इन्हीं आंकड़ों की छमाही रिपोर्ट के आधार पर नराकास द्वारा छमाही बैठक में पुरस्कार प्रदान किया जाता है।



संस्थान में विज्ञान के क्षेत्र में हिंदी का उपयोग

  • सभी प्रकार की वैज्ञानिक/तकनीकी संगोष्ठियों तथा परिचर्चाओं आदि में वैज्ञानिकों आदि को राजभाषा हिंदी में शोध पत्र पढ़ने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित किया जाता है। जो संस्थाान के शोध एवं मुख्य विषय से संबंधित होता है। हिंदी में वैज्ञानिक संगोष्ठियों का नियमित आयोजन किया जाता है, अब तक हिंदी में तीन राष्ट्रीय एवं दो अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक संगोष्ठियाँ आयोजित की गई हैं।
  • जनजागरण अभियान के अंतर्गत संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा नियमित रूप से हिंदी समाचार पत्रों में लेख प्रकाशित किए जाते हैं। दूरदर्शन, दूरदर्शन किसान चैनल एवं निजी टेलेविजन चैनलों पर स्वास्थ्य, जल, वायु एवं पर्यावरण एवं अन्य वैज्ञानिक विषयों से संबंधित हिंदी भाषा में प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों में संस्थान की ओर से प्रतिभागिता की जाती है।
  • इनके अतिरिक्त प्रदर्शनी, मेलों आदि में ज्ञानवर्धक जानकारी प्रदान करने हेतु अनेक हिंदी / द्विभाषी पोस्टर, लघु पुस्तकें आदि भी हिंदी में प्रकाशित की जा चुकी हैं।


संस्थान में प्रशासन एवं संबद्ध विभागों में हिंदी का उपयोग

  • कम्यूटर, ई-मेल और वेबसाइट सहित उपलब्ध सूचना प्रौद्योगिकी सुविधाओं का अधिक से अधिक उपयोग करते हुए हिंदी में काम को बढ़ाया गया है। संस्थान में वैज्ञानिक, सूचना प्रौद्योगिकी तथा तकनीकी विषयों में हिंदी के प्रयोग को अधिक से अधिक किया जाता है। कम्यू्टर पर हिंदी प्रयोग के लिए केवल यूनिकोड इनकोडिंग का प्रयोग किया जाता है। संस्थान द्वारा राजभाषा से संबंधित सूचना प्रौद्योगिकी प्रणाली के विकास पर विशेष ध्यान देते हुए शत-प्रतिशत कम्यूटरों में हिन्दी में काम करने की सुविधा विकसित की गई है।
  • हिंदी भाषा, हिंदी टंकण/आशुलिपि संबंधी प्रशिक्षण कार्य पूरा है।
  • संस्थान की राजभाषा कार्यान्वयन समिति की तिमाही बैठक का नियमित आयोजन सुनिश्चित किया गया है। बैठक में लिए गए निर्णयों का पूरी तरह अनुपालन किया जाता है।
  • अंतर मंत्रालयी/अंतर विभागीय पत्राचारों के साथ-साथ गैर-सरकारी संगठनों के साथ किए जाने वाले पत्राचारों में ई-मेल/इलेक्ट्रॉनिक संदेशों आदि में अधिक से अधिक हिंदी का प्रयोग सुनिश्चित किया जाता है।
  • हिंदी के समाचार पत्रों में हिंदी में तथा अंग्रेजी समाचार पत्रों में अंग्रेजी में विज्ञापन दिए जाते हैं।
  • राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 3(3) के अंतर्गत सभी कागजात द्विभाषिक रूप में जारी किए जाते हैं।
  • अधीनस्थ सेवाओं की भर्ती परीक्षाओं में अंग्रेजी के अनिवार्य प्रश्‍न पत्र को छोड़कर शेष विषयों के प्रश्‍न पत्रों के उत्तार हिंदी में भी देने की छूट दी जाती है और ऐसे प्रश्‍न पत्र द्विभाषी रूप से हिंदी तथा अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध कराए जाते हैं। साक्षात्का‍र में भी वार्तालाप में हिंदी माध्यम की उपलब्धता अनिवार्य रूप से रहती है। सभी सेवाकालीन विभागीय तथा पदोन्निति परीक्षाओं में (अखिल भारतीय स्तर की परीक्षाओं सहित) अभ्यर्थियों को प्रश्‍न पत्रों के उत्तर हिंदी में भी देने की छूट दी जाती है। प्रश्‍न पत्र अनिवार्यत: दोनों भाषाओं (हिंदी और अंग्रेजी) में तैयार किये जाते हैं।
  • राजभाषा नियम, 1976 के नियम 10(4) के कार्यालय अधिसूचित है एवं नियम 8(4) के अंतर्गत सभी प्रवीणता प्राप्त कर्मियों को हिंदी में कार्य करने हेतु निदेशक महोदय की ओर से व्यक्तिश: आदेश जारी किया गया है।
  • संस्थान में सभी लेखन सामग्री, नाम पट्ट, सूचना पट्ट, फार्म प्रक्रिया संबंधी साहित्य , रबड़ की मोहरें, निमंत्रण पत्र आदि अनिवार्य रूप से हिंदी-अंग्रेजी में बनवाए जाते हैं।
  • अनुवाद कार्य तथा राजभाषा नीति के कार्यान्वयन से जुड़े सभी अधिकारियों/कर्मचारियों को केंद्रीय अनुवाद ब्यूरो से अनिवार्य अनुवाद प्रशिक्षण प्राप्त है। अनुवादकों को सहायक साहित्य, मानक शब्दकोश (अंग्रेजी-हिंदी व हिंदी-अंग्रेजी) तथा अन्य तकनीकी शब्दावलियां उपलब्ध कराया गया है, ताकि वे अनुवाद कार्य में इनका उपयोग कर सकें।
  • संस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अपने सरकारी कामकाज में अधिक से अधिक हिंदी का प्रयोग किया जाता है।
  • संस्थान द्वारा हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए चलाई गई विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं को लागू किया गया है इसमें अधिक से अधिक अधिकारी/कर्मचारी इन योजनाओं का लाभ उठाते हैं। फलस्वरूप सरकारी कामकाज में अधिक से अधिक कार्य हिंदी में होता है।
  • हिंदी में कार्य करने में आ रही कठिनाइयों को दूर करने के लिए नियमित कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं जिनमें संबंधित विषयों पर हिंदी में कार्य करने का अभ्यास करवाया जाता है। हिंदी कार्यशालाओं में हिंदी लेखन अभ्यास पर बल दिया जाता है तथा यूनिकोड इनकोडिंग, ई-मेल, डिक्टेशन का उपयोग करना भी सिखाया जाता है। हिंदी में विज्ञान एवं स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों एवं चिकित्सकों का व्याख्यान नियमित रूप से आयोजित किया जाता है।
  • नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों की छमाही बैठकों में संस्थान के निदेशक अनिवार्य रूप से भाग लेते हैं।
  • कार्यालय-प्रमुख कामकाज में मूल रूप से हिंदी का उपयोग करते हैं।
  • संस्थान की वेबसाइट सम्पूर्ण रूप से हिंदी में विकसित है।
  • भारत सरकार, गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग को नियमित‍ रूप से जून, 2012 से ऑनलाइन रिपोर्ट समय से भेजी जाती है।
  • पुस्तकालय में कुल 866 हिंदी की पुस्तकें हैं।
  • संस्थान में प्रत्येक वर्ष 14 से 20 सितंबर के दौरान हिंदी सप्ताह मनाया जाता है। सप्ताह के अंतर्गत, हिंदीतर भाषी का हिंदी ज्ञान, लेख, वाद-विवाद, आशुभाषण, अनुवाद, प्रस्तुतीकरण, स्लोगन, कविता/ कहानी की रचना एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं।
  • संस्थान की फेसबुक, ट्विटर एवं यूट्यूब पर भी उपलब्धता है।
  • इंट्रानेट पर सभी फॉर्म द्विभाषी रूप में उपलब्ध हैं।

राजभाषा की पृष्ठभूमि

संविधान के लागू होने के साथ-साथ 26 जनवरी, 1950 से संविधान की धारा 343 के अनुसार हिंदी भारत संघ की राजभाषा बनी। धारा 351 में भारत सरकार को यह कर्तव्य सौंपा गया कि वह हिंदी भाषा का प्रसार बढ़ाए और उसका विकास करे, ताकि हिंदी भारत की सामासिक संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके। यह स्वाभाविक था कि भारत सरकार के कामों में बहुत पहले से इस्तेमाल की जा रही भाषा के स्थान पर हिंदी भाषा के प्रयोग के लिये निरन्तर प्रयास किए जाएं और सरकारी कामों में उसका इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए लगातार आदेश भी जारी किए जाएं। तदनुसार राष्ट्र्पति जी ने सन् 1952 में कुछ कामों में हिंदी के इस्तेमाल के लिए आदेश जारी किए। फिर 1955 में कई आदेश जारी किए गए। 27 अप्रैल, 1960 को राष्ट्रपति जी ने अधिसूचना संख्या 2/8/60-रा0भा0 द्वारा विस्तृ्त आदेश जारी किए। इसके पश्चात् राजभाषा अधिनियम 1963 बना और 1967 में उसका संशोधन भी हुआ। इस बीच गृह मंत्रालय की ओर से राजभाषा हिंदी के प्रयोग के लिए लगातार आदेश जारी होते रहे। गृह मंत्रालय में राजभाषा विभाग बन जाने के पश्चात् नियम 1976 बने और सभी क्षेत्रों में देश की राजभाषा हिंदी को लागू करने के लिए उत्पन्न हुई भावना के अनुकूल सरकारी कामकाज में हिंदी का प्रयोग होने भी लगा जो निरंतर बढ़ रहा है।

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